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अधिक मास पूर्णिमा अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) की पूर्णिमा का हिंदू धर्म में अत्यंत उच्च आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है, जो लगभग 3 वर्षों में एक बार आती है। यह पूर्णिमा भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित है, और इस दिन किया गया स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अनंत गुना अधिक पुण्य फल (अक्षय फल) प्रदान करता है। यह पवित्र तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ है। अधिक मास पूर्णिमा का महत्व और लाभ:भगवान विष्णु की कृपा: इस दिन भगवान विष्णु (सत्यनारायण रूप) और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से सुख, सौभाग्य, धन और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।पापों का नाश: मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मिक शुद्धि होती है।अक्षय पुण्य: इस दिन किए गए स्नान (विशेषकर गंगा या पवित्र नदियों में) और दान का फल कल्पवृक्ष के समान अक्षय (कभी न खत्म होने वाला) माना जाता है।पितरों का आशीर्वाद: यह पूर्णिमा पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने और उनके श्राद्ध के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है।मनोकामना पूर्ति: यह तिथि कल्पवृक्ष के समान भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली मानी जाती है। इस दिन क्या करें?स्नान-दान: पवित्र नदियों में स्नान करें या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें, फिर निर्धनों को दान दें।सत्यनारायण पूजा: घर पर भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें।दीपदान: भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं, विशेषकर पीपल या तुलसी के पास।वृक्षारोपण: पीपल, वट या गूलर का पेड़ लगाने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।संक्षेप में, यह दिन आध्यात्मिक उत्थान, मानसिक शांति और सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - 31#$2026 <f4R -56 अधिक पूर्णिमा २०२६ 31#$2026 <f4R -56 अधिक पूर्णिमा २०२६ - ShareChat