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#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ क्या अब आपको UPI से किए गए हर ट्रांजैक्शन के लिए चार्ज देना होगा? लोकसभा में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में संशोधन बिल पास होने के बाद बहुत से लोग यह सवाल पूछ रहे हैं।
इस संशोधन से सरकार को बैंकों और अन्य पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को यह अधिकार देने की मंजूरी मिल गई है कि वे UPI और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों से किए गए ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगा सकें। यह संशोधन मौजूदा कानूनी रोक को हटाता है जो बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकती थी।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सरकार से उम्मीद है कि वह बिजनेस के लिए जाने वाले ₹2000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% के बीच मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की मंजूरी देगी, जबकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले पेमेंट इस प्रस्तावित लेवी के दायरे से बाहर रहेंगे।
इस प्रस्ताव से दूध, सब्जी, किराने का सामान जैसी रोजमर्रा की खरीदारी या ऑटो-रिक्शा और टैक्सी सेवाओं के पेमेंट पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट ग्राहकों के बजाय मर्चेंट पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि इस लेवी से बैंक और फिनटेक कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी में निवेश को मज़बूत कर पाएंगी।
UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज
अगर आप जानना चाहते हैं कि ये UPI से पेमेंट करने पर चार्ज क्या हैं और इनका भुगतान कौन करेगा, तो यहां 'पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया' द्वारा दिए गए सात सवालों के जवाब दिए गए हैं।
सवाल 1. क्या UPI इस्तेमाल करने के लिए मुझे पैसे देने होंगे?
नहीं। 2016 में लॉन्च होने के बाद से ही UPI ग्राहकों के लिए हमेशा मुफ़्त रहा है। हर भारतीय बिना किसी ट्रांजैक्शन चार्ज के तुरंत डिजिटल पेमेंट कर सकता है।
सवाल 2. क्या छोटे दुकानदारों या किराना स्टोर से UPI पेमेंट लेने के लिए कोई चार्ज लिया जाएगा?
नहीं। छोटे व्यापारियों को UPI पेमेंट लेने के लिए कोई चार्ज (MDR) नहीं देना पड़ता है। UPI को इसलिए बनाया गया था ताकि भारत में छोटे से छोटे बिजनेस के लिए भी डिजिटल पेमेंट आसान हो सके, और छोटे व्यापारियों का ध्यान रखना इस सिस्टम के समावेशी विकास के लिए बहुत जरूरी है।
सवाल 3. अभी UPI चार्ज को लेकर चर्चा क्यों हो रही है?
UPI एक नए पेमेंट प्लेटफॉर्म से बदलकर दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है। जैसे-जैसे इसका इकोसिस्टम बढ़ रहा है, इस बात पर चर्चा हो रही है कि उस इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक कैसे सपोर्ट किया जाए जो हर महीने अरबों सुरक्षित ट्रांजैनक्शन को मुमकिन बनाता है, और साथ ही यह भी पक्का किया जाए कि कंज्यूमर और छोटे व्यापारी सुरक्षित रहें।
सवाल 4. UPI को किसने बनाया और इसमें कौन निवेश करता रहता है?
लगभग 10 सालों से, बैंकों, पेमेंट कंपनियों, फिनटेक कंपनियों, NPCI और RBI ने मिलकर टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी रोकने, इनोवेशन और कस्टमर सपोर्ट में निवेश किया है, ताकि दुनिया के सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद पेमेंट सिस्टम में से एक को बनाया जा सके। UPI को सुरक्षित, मजबूत और 24×7 चालू रखने के लिए ये निवेश हर दिन किए जाते हैं।
सवाल 5. अगर UPI फ्री है, तो इसे चलाने का खर्च कौन उठाता है?
नेशनल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने में टेक्नोलॉजी, धोखाधड़ी रोकने, साइबर सिक्योरिटी, नियमों का पालन, कस्टमर सपोर्ट और इनोवेशन में लगातार निवेश करना पड़ता है। ये खर्च अभी इकोसिस्टम में शामिल लोग उठाते हैं, जिनमें बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर शामिल हैं। वे निवेश करते रहते हैं ताकि ग्राहक सुरक्षित और आसानी से पेमेंट करने का अनुभव ले सकें।
सवाल 6. क्या पेमेंट स्वीकार करने के लिए बड़े मर्चेंट (व्यापारी) के पैसे देने पर ग्राहकों को भी पैसे देने होंगे?
नहीं। मर्चेंट सर्विस चार्ज, जहां भी लागू होते हैं, मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच कमर्शियल समझौते होते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने के लिए ग्राहकों को पैसे देने होंगे। दुनिया भर में, मर्चेंट सर्विस चार्ज डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का एक आम हिस्सा हैं, जबकि ग्राहक सुविधाजनक और सुरक्षित डिजिटल पेमेंट अनुभव का लाभ उठाते रहते हैं।
सवाल 7. UPI इकोसिस्टम को बनाए रखना क्यों जरूरी है?
UPI एक अहम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बन गया है, जिसका इस्तेमाल हर दिन करोड़ों भारतीय करते हैं। जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है, सुरक्षा, मजबूती, इनोवेशन, धोखाधड़ी से बचाव और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश जरूरी रहेगा, ताकि यह पक्का किया जा सके कि UPI आने वाले कई सालों तक ग्राहकों और व्यवसायों को भरोसेमंद सेवा देता रहे।
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