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#Quran and We #📕 કુરાન #islam guide us in every field of life #सोचने वाली बात #points to ponder
Quran and We - Faith, Freedom, and Fellowship 9/4/25 (१) कुरान 18:29* "और कह दो, श्यह (सत्य) तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, तो अब जो चाहे वह मान ले और जो चाहे वह इनकार कर दे।१  (यह आयत व्यक्तिगत विश्वास और चयन की स्वतंत्रता पर जोर देती हैI) (२) कुरान 25:57* "कह दो,  मैं इस (सेवा) के बदले में तुमसे कोई बदला (पारिश्रमिक) नहीं माँगता| मेरी चाह बस यही है किजो कोई चाहे, वह अपने रब की ओर ले जाने वाला मार्ग अपना ले।१  (यह निस्वार्थ सेवा और ईश्वर की ओर जाने वाले मार्ग के स्वतंत्र चूनाव के बारे में हैl) Faith, Freedom, and Fellowship 9/4/25 (१) कुरान 18:29* "और कह दो, श्यह (सत्य) तुम्हारे रब की ओर से सत्य है, तो अब जो चाहे वह मान ले और जो चाहे वह इनकार कर दे।१  (यह आयत व्यक्तिगत विश्वास और चयन की स्वतंत्रता पर जोर देती हैI) (२) कुरान 25:57* "कह दो,  मैं इस (सेवा) के बदले में तुमसे कोई बदला (पारिश्रमिक) नहीं माँगता| मेरी चाह बस यही है किजो कोई चाहे, वह अपने रब की ओर ले जाने वाला मार्ग अपना ले।१  (यह निस्वार्थ सेवा और ईश्वर की ओर जाने वाले मार्ग के स्वतंत्र चूनाव के बारे में हैl) - ShareChat