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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - M 5mslನ1  परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। ಹhal R 6 ' lls ಊ (s < FG 991 बेरे बेनिक्स को ६ जयाराज और उनके या लंबी उमा ळीदिशा मैं मील का पत्थर सातित हौ सळती हें ॰ 1 लॉन्जिविटी इंडिया बना रहा है भारतीयों के लिए सेहत का 11 स्वदेशी पैमाना , लंबी उम्र के  जेनेटिक ब्लूप्रिंट पर काम के लिए २०३० तक १०,००० स्वस्थ भारतीयों के पाया  जाता है। রীপীলৌনিন अक्सर कम होगी अगार हम २० हजार स्वस्थ भारतीयों के सैंपल का  सैंपल इकट्ठा करना ( आदर्श लक्ष्य लाख का ) प्रो॰दीपक सेनी है। इस प्रोजेक्ट में आईआईएससी के साथ साथ लॉनिव्टी इंडिया E ক্ি মানে वैज्ञानिक विश्लेषण करें, तो मुमकिन आईआईटी दिल्ली , एम्स और आईआईटी हैदराबाद प्रोजेक्टके हेड के लिए एक नई और ज्यादा सटीक नॉर्मल वैल्यू = जैसे संस्थान भी जुड़ रहे हैं। हालांकि अभी यह सामने आए। यह प्रोजेक्ट स्वदेशी बेसलाइन तैयार जव आप ब्लड टेस्ट करवाते हैँ और = 7 डेटा कलेक्शन के चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों  करने की कोशिश है। रिपटं मे आपको वैल्यू नॉर्मल आती है, तो क्या को उम्मीद है कि २०२७ से २०३० के बीच इसके रिसर्चर खोज रहे हैं उम्र बढ़ने के साथ ৪? 3ন নন্ধ মানে স 7 अप वाकह ऐसे परिणाम आएंगे , जो चिकित्सा जगत की दिशा इस्तमाल होने वाले स्वास्थ्य के मानक यातो इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हैं बदल देंगे। यह कोई ' अमृत ' खोजने का दावा नही पश्चिमी देशों को नकल हेया बहुत पुराने डेटा प्रमुख रिसर्च चल रही है। उम्र को रोका नहीं जा सकता, लेकिन पर आरघारत ह। लेकिन अव भारतीय विज्ञान इसः मिशन के तहत बुढ़ापे बॅगलुरु  लाचारी को कम किया जा सकता है। इस् रिसर्च का BHARAT स्टडी। इसका मतलब संस्थान ( आइआईएससी ) इस विसंगति 8 T & है बायोमार्कर्स ऑफ हेल्दी एजिंग, रेजिलिएंस अंतिम लक्ष्य भारतीयों के जीवन को गुणवता को को दूर करने के लिए एक मिशन चला रहा है॰ एडवर्सिटी एंड ट्रांजिशन। बेहतर बनाना है॰ ताकि हम उम्र के आखिरी पडाव लन्जिवटी झढया प्रोजेक्ट। भारतीयों का शरीर जरिए   स्वस्थ इसके तक सक्रिय और स्वस्थ रहे। जनेटिक्स खान पान और प्रदूषण पश्चिमी देशों भारतीयों के मॉलिक्यूलर डेटा का विश्लेषण किया इन रिसर्च से होगा यह फायदा নিল্কুল जा रहा हे ताकि यह समझा जा सके कि उम्र बढने अलग हे। इसलिए हमारे स्वास्थ्य कैंसर के पैटर्न को समझना आसान होगा को नापने का पैमाना भी अलग होना चाहिए। के साथ हमारे इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हें। दूसरी रिसर्च हे व्तमान महम जिन नॉर्मल वेल्यू को आधार ऑर्गन एजिंग प्रोजेक्टः इसके ऑर्गन फेल्योर की दरको कम किया जा सकेगा। मानकर इलाज करते ह॰ बे भारती्यां क लिए तहत शोथ चल रहा है कि शरीर के अलग अलग भारतीयों की औसत उम्र में इजाफा हो सकेगा।  सटीक नईी ह। उदाहरण, भारत मे महिलाओं का ( जैसा मनोरमा को बताया ) अंग किस रफ्तार से बूढ़े होते है। इन प्रोजेक्ट्स M 5mslನ1  परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। ಹhal R 6 ' lls ಊ (s < FG 991 बेरे बेनिक्स को ६ जयाराज और उनके या लंबी उमा ळीदिशा मैं मील का पत्थर सातित हौ सळती हें ॰ 1 लॉन्जिविटी इंडिया बना रहा है भारतीयों के लिए सेहत का 11 स्वदेशी पैमाना , लंबी उम्र के  जेनेटिक ब्लूप्रिंट पर काम के लिए २०३० तक १०,००० स्वस्थ भारतीयों के पाया  जाता है। রীপীলৌনিন अक्सर कम होगी अगार हम २० हजार स्वस्थ भारतीयों के सैंपल का  सैंपल इकट्ठा करना ( आदर्श लक्ष्य लाख का ) प्रो॰दीपक सेनी है। इस प्रोजेक्ट में आईआईएससी के साथ साथ लॉनिव्टी इंडिया E ক্ি মানে वैज्ञानिक विश्लेषण करें, तो मुमकिन आईआईटी दिल्ली , एम्स और आईआईटी हैदराबाद प्रोजेक्टके हेड के लिए एक नई और ज्यादा सटीक नॉर्मल वैल्यू = जैसे संस्थान भी जुड़ रहे हैं। हालांकि अभी यह सामने आए। यह प्रोजेक्ट स्वदेशी बेसलाइन तैयार जव आप ब्लड टेस्ट करवाते हैँ और = 7 डेटा कलेक्शन के चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों  करने की कोशिश है। रिपटं मे आपको वैल्यू नॉर्मल आती है, तो क्या को उम्मीद है कि २०२७ से २०३० के बीच इसके रिसर्चर खोज रहे हैं उम्र बढ़ने के साथ ৪? 3ন নন্ধ মানে স 7 अप वाकह ऐसे परिणाम आएंगे , जो चिकित्सा जगत की दिशा इस्तमाल होने वाले स्वास्थ्य के मानक यातो इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हैं बदल देंगे। यह कोई ' अमृत ' खोजने का दावा नही पश्चिमी देशों को नकल हेया बहुत पुराने डेटा प्रमुख रिसर्च चल रही है। उम्र को रोका नहीं जा सकता, लेकिन पर आरघारत ह। लेकिन अव भारतीय विज्ञान इसः मिशन के तहत बुढ़ापे बॅगलुरु  लाचारी को कम किया जा सकता है। इस् रिसर्च का BHARAT स्टडी। इसका मतलब संस्थान ( आइआईएससी ) इस विसंगति 8 T & है बायोमार्कर्स ऑफ हेल्दी एजिंग, रेजिलिएंस अंतिम लक्ष्य भारतीयों के जीवन को गुणवता को को दूर करने के लिए एक मिशन चला रहा है॰ एडवर्सिटी एंड ट्रांजिशन। बेहतर बनाना है॰ ताकि हम उम्र के आखिरी पडाव लन्जिवटी झढया प्रोजेक्ट। भारतीयों का शरीर जरिए   स्वस्थ इसके तक सक्रिय और स्वस्थ रहे। जनेटिक्स खान पान और प्रदूषण पश्चिमी देशों भारतीयों के मॉलिक्यूलर डेटा का विश्लेषण किया इन रिसर्च से होगा यह फायदा নিল্কুল जा रहा हे ताकि यह समझा जा सके कि उम्र बढने अलग हे। इसलिए हमारे स्वास्थ्य कैंसर के पैटर्न को समझना आसान होगा को नापने का पैमाना भी अलग होना चाहिए। के साथ हमारे इम्यून सिस्टम में क्या बदलाव आते हें। दूसरी रिसर्च हे व्तमान महम जिन नॉर्मल वेल्यू को आधार ऑर्गन एजिंग प्रोजेक्टः इसके ऑर्गन फेल्योर की दरको कम किया जा सकेगा। मानकर इलाज करते ह॰ बे भारती्यां क लिए तहत शोथ चल रहा है कि शरीर के अलग अलग भारतीयों की औसत उम्र में इजाफा हो सकेगा।  सटीक नईी ह। उदाहरण, भारत मे महिलाओं का ( जैसा मनोरमा को बताया ) अंग किस रफ्तार से बूढ़े होते है। इन प्रोजेक्ट्स - ShareChat