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#✍मेरे पसंदीदा लेखक
✍मेरे पसंदीदा लेखक - मैंने खुद को छला है॰ मुझे बहुत पहले ही पता था होने वाला है" "क्या आत्मसम्मान पे लगे ज़ख्म माफ़ी की इजाजत नहीं देते ख़त्म हो गई मेरी, लोगों के साथ रहने की चाह..!! अब मुझे अकेले रहने में सुकून मिलता है! बेक़द्रो के अगर चाँद भी लग जाए वे हाथो उसे भी ग्रहण लगाने का हुनर रखते है !! मैंने खुद को छला है॰ मुझे बहुत पहले ही पता था होने वाला है" "क्या आत्मसम्मान पे लगे ज़ख्म माफ़ी की इजाजत नहीं देते ख़त्म हो गई मेरी, लोगों के साथ रहने की चाह..!! अब मुझे अकेले रहने में सुकून मिलता है! बेक़द्रो के अगर चाँद भी लग जाए वे हाथो उसे भी ग्रहण लगाने का हुनर रखते है !! - ShareChat