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✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - वशीकरण तंत्र तंत्र-शास्त्र में सैकड़ों ऐसे प्रयोग प्राप्त होते हैं, जिनके द्वारा सम्मोहन और वशीकरण का प्रभाव उत्पन्न किया जा सकता है। ऐसे प्रयोगों में तंत्र और मुहूर्त्त का विशेष महत्त्व रहता है। इनके अभाव में साधना फलीभूत नहीं होती। नीचे कुछ ऐसे प्रयोगों का संक्षिप्त उल्लेख किया जा रहा है- 9د= ३० सर्वलोक वशं कराय कुरु स्वाहा।  '३४ नमो भगवते ज्वालाग्नि शय्यादिष्टा विनाय स्वाहा। " विघि- इनमें से किसी भी एक मंत्र को शुभन्मुहूर्त्त में॰ के सूर्योदय  उत्तराभिमुख स्थिति में मूँगे की माला  उपरान्त स्नानादि से पवित्र होकर, द्वारा जपना चाहिए। जपनसंख्या १२५००० है। जप के पश्चात् १०८ से हवन भी करें। इस प्रकार यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा। बाद में आहुतियों आवश्यकतानुसार प्रयोज्यन्वस्तु को इसी मंत्र द्वारा (२१ बार पढ़कर ) करके काम में लाना चाहिए। प्रभावित बेलपत्र और बिजौरा, अथवा अपामार्ग की जड़, बकरी के दूध में १ घिसकर तिलक करने से वशीकरण होता है। भाँगरा, सफेद लाजवन्ती, सहदेवी की को एक में সভ কালা २ पीसकर उसी लेप का तिलक करने से वशीकरण प्रभाव उत्तपन्न होता है। भाँग के बीज ग्वारपाठे की जड़ में पीसकर तिलक करने से भी॰ ३ ऐसा प्रभाव उत्पन्न होता है। केशर , गोरोचन, तम्बाकू त्था शिलाजीत ४. गूलर की जड़ अथवा के मिश्रण को पीसकर तिलक करने से वशीकरण होता है। भोजपत्र पर शत्रु का नाम लिखकर शहद में डुबोकर पवित्र स्थान पर रखने से वह वशीभूत हो जाता है। को केले के रस में पीसकर तिलक fig ६. असगन्ध , हरताल और की पत्तियों को गोनदुग्ध में पीसकर तिलक अथवा पान और বুলমী ಫೇ लगायें तोभी वशीकरण होता है। केशर ,  गोरोचन और महावर से भोजपत्र पर अभीष्ट m a ७ वशीभूत " लिखकर एकान्त पवित्र स्थान में रखने से वह  எ1 81 वशीकरण तंत्र तंत्र-शास्त्र में सैकड़ों ऐसे प्रयोग प्राप्त होते हैं, जिनके द्वारा सम्मोहन और वशीकरण का प्रभाव उत्पन्न किया जा सकता है। ऐसे प्रयोगों में तंत्र और मुहूर्त्त का विशेष महत्त्व रहता है। इनके अभाव में साधना फलीभूत नहीं होती। नीचे कुछ ऐसे प्रयोगों का संक्षिप्त उल्लेख किया जा रहा है- 9د= ३० सर्वलोक वशं कराय कुरु स्वाहा।  '३४ नमो भगवते ज्वालाग्नि शय्यादिष्टा विनाय स्वाहा। " विघि- इनमें से किसी भी एक मंत्र को शुभन्मुहूर्त्त में॰ के सूर्योदय  उत्तराभिमुख स्थिति में मूँगे की माला  उपरान्त स्नानादि से पवित्र होकर, द्वारा जपना चाहिए। जपनसंख्या १२५००० है। जप के पश्चात् १०८ से हवन भी करें। इस प्रकार यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा। बाद में आहुतियों आवश्यकतानुसार प्रयोज्यन्वस्तु को इसी मंत्र द्वारा (२१ बार पढ़कर ) करके काम में लाना चाहिए। प्रभावित बेलपत्र और बिजौरा, अथवा अपामार्ग की जड़, बकरी के दूध में १ घिसकर तिलक करने से वशीकरण होता है। भाँगरा, सफेद लाजवन्ती, सहदेवी की को एक में সভ কালা २ पीसकर उसी लेप का तिलक करने से वशीकरण प्रभाव उत्तपन्न होता है। भाँग के बीज ग्वारपाठे की जड़ में पीसकर तिलक करने से भी॰ ३ ऐसा प्रभाव उत्पन्न होता है। केशर , गोरोचन, तम्बाकू त्था शिलाजीत ४. गूलर की जड़ अथवा के मिश्रण को पीसकर तिलक करने से वशीकरण होता है। भोजपत्र पर शत्रु का नाम लिखकर शहद में डुबोकर पवित्र स्थान पर रखने से वह वशीभूत हो जाता है। को केले के रस में पीसकर तिलक fig ६. असगन्ध , हरताल और की पत्तियों को गोनदुग्ध में पीसकर तिलक अथवा पान और বুলমী ಫೇ लगायें तोभी वशीकरण होता है। केशर ,  गोरोचन और महावर से भोजपत्र पर अभीष्ट m a ७ वशीभूत " लिखकर एकान्त पवित्र स्थान में रखने से वह  எ1 81 - ShareChat