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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - चीँटी का भंडार सतकतलापढ दूंगी। टिड्डे ने कहा, ठंड में तो अभी काफी समय  गर्मी के दिनों की बात है। मैदान में एक टिड्डा है, उसकी चिंता अभी से क्यूं करनी ? चींटी चली फुदक रहा था। वह बहुत मस्ती में था। अचानक एक चींटी उसके सामने से गुजरी। उसने देखा गई और अपना काम जारी रखा। आखिरकार जब ठंड के दिन आए तो टिड्डा भूख से बेहाल हो कि चींटी एक मक्के के दाने को हुए लुढ़काते गया और दाने-्दाने का मोहताज हो इसके गया, अपने घर में ले जाने का प्रयास कर रही है। यह उलट चींटी के पांस खाने का भंडार था। टिड्डे को देखकर टिड्डा उससे बोला कि इतनी मेहनत करने के बजाय आओ कुछ अच्छा समय " अपनी गलती का एहसास हुआ।  हैं। गुजारते मोरल ऑफ द स्टौरी  कल की सोचें अच्छा चींटी ने कहा, मैं ठंड के लिए खाना जमा कर और मैं तुम्हें भी ऐसा ही करने की सलाह रही हूं " ] मिनट रीोड समय हमेशा साथ नहीं होता। चीँटी का भंडार सतकतलापढ दूंगी। टिड्डे ने कहा, ठंड में तो अभी काफी समय  गर्मी के दिनों की बात है। मैदान में एक टिड्डा है, उसकी चिंता अभी से क्यूं करनी ? चींटी चली फुदक रहा था। वह बहुत मस्ती में था। अचानक एक चींटी उसके सामने से गुजरी। उसने देखा गई और अपना काम जारी रखा। आखिरकार जब ठंड के दिन आए तो टिड्डा भूख से बेहाल हो कि चींटी एक मक्के के दाने को हुए लुढ़काते गया और दाने-्दाने का मोहताज हो इसके गया, अपने घर में ले जाने का प्रयास कर रही है। यह उलट चींटी के पांस खाने का भंडार था। टिड्डे को देखकर टिड्डा उससे बोला कि इतनी मेहनत करने के बजाय आओ कुछ अच्छा समय " अपनी गलती का एहसास हुआ।  हैं। गुजारते मोरल ऑफ द स्टौरी  कल की सोचें अच्छा चींटी ने कहा, मैं ठंड के लिए खाना जमा कर और मैं तुम्हें भी ऐसा ही करने की सलाह रही हूं " ] मिनट रीोड समय हमेशा साथ नहीं होता। - ShareChat