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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः गृहस्थ का आधार है जीवित जीवन। स्त्री और पुरुष विवाह - संस्कार के द्वारा गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। तब वे गृहस्थाश्रमी कहलाते हैं। स्मरण रहे विवाह संस्कार का अर्थ दो शरीरों का मिलन नहीं होता बल्कि हमारे यहां विवाह सिद्धांत नहीं वर्ण हृदय की आत्मा की मनकी एकता का संस्कार है।जो विवाह को फिजिकल कामोपभोग का सामाजिक मुद्रा-पत्र मानदंड हैवे भूल जाते हैं। वे अज्ञान में हैं। विवाह का यह प्रस्ताव कदापि नहीं है। भारतीय जीवन पद्धति में इसका उद्देश्य बहुत बड़ा है दिव्य है पवित्र है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः गृहस्थ का आधार है जीवित जीवन। स्त्री और पुरुष विवाह - संस्कार के द्वारा गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। तब वे गृहस्थाश्रमी कहलाते हैं। स्मरण रहे विवाह संस्कार का अर्थ दो शरीरों का मिलन नहीं होता बल्कि हमारे यहां विवाह सिद्धांत नहीं वर्ण हृदय की आत्मा की मनकी एकता का संस्कार है।जो विवाह को फिजिकल कामोपभोग का सामाजिक मुद्रा-पत्र मानदंड हैवे भूल जाते हैं। वे अज्ञान में हैं। विवाह का यह प्रस्ताव कदापि नहीं है। भारतीय जीवन पद्धति में इसका उद्देश्य बहुत बड़ा है दिव्य है पवित्र है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat