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#बलिदान दिवस #🇮🇳 देशभक्ति #🙏🏻माँ तुझे सलाम #आज जिनकी पुण्यतिथि है #शहीद दिवस
बलिदान दिवस - लेकिन पुलिस तो उनके पीछे पड़ी ही थी. १५ जून को ने उस मकान को भी घेर लिया, जहां से वे अपनी पुलिस गतिविधियां चला रहे थे. उस समय तीन क्रान्तिकारी वहां थे. दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गयी॰ पास के मकान से दो पुलिस वालों घुसने का प्रयास किया, पर ने इधर  क्रान्तिवीरों की गोली से दोनों घायल हो गये. क्रान्तिकारियों के पास सामग्री बहुत कम थी, अतः तीनों दरवाजा खोलकर गोली चलाते हुए बाहर भागे. नलिनी की गोली से पुलिस अधिकारी का टोप उड़ गया, पर उनकी संख्या बहुत अधिक थी. अन्ततः नलिनी गोली से घायल होकर गिर पडे़. দুলিম वाले उन्हें बग्घी में डालकर अस्पताल ले गये, जहां अगले दिन १६ जून, १९१८ को नलिनीकान्त बागची ने भारत मां को स्वतन्त्र कराने की अधूरी कामना मन में लिये ही शरीर नलिनीकांत बागची त्याग दिया. शहादत १६ जून १९१८ अस्पताल में १५ जून को तीन गोलियां लगी 0   ( = शत शत नमन लेकिन पुलिस तो उनके पीछे पड़ी ही थी. १५ जून को ने उस मकान को भी घेर लिया, जहां से वे अपनी पुलिस गतिविधियां चला रहे थे. उस समय तीन क्रान्तिकारी वहां थे. दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गयी॰ पास के मकान से दो पुलिस वालों घुसने का प्रयास किया, पर ने इधर  क्रान्तिवीरों की गोली से दोनों घायल हो गये. क्रान्तिकारियों के पास सामग्री बहुत कम थी, अतः तीनों दरवाजा खोलकर गोली चलाते हुए बाहर भागे. नलिनी की गोली से पुलिस अधिकारी का टोप उड़ गया, पर उनकी संख्या बहुत अधिक थी. अन्ततः नलिनी गोली से घायल होकर गिर पडे़. দুলিম वाले उन्हें बग्घी में डालकर अस्पताल ले गये, जहां अगले दिन १६ जून, १९१८ को नलिनीकान्त बागची ने भारत मां को स्वतन्त्र कराने की अधूरी कामना मन में लिये ही शरीर नलिनीकांत बागची त्याग दिया. शहादत १६ जून १९१८ अस्पताल में १५ जून को तीन गोलियां लगी 0   ( = शत शत नमन - ShareChat