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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🌞 Good Morning🌞 #🌙 गुड नाईट #🌷शुभ रविवार
❤️अस्सलामु अलैकुम - 5/7 (आशूरा ) के दिन की घटनाएँ 10 मुहर्रम १. अंतिम जंग (शहादत की शुरुआत): सुबह की नमाज़ के बाद, यज़ीद की हज़ारों की फौज ने हमला शुरू किया। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स. ) के साथ केवल ७२ लोग थे (जिनमें उनके परिवार के सदस्य और वफादार साथी शामिल थे)। एक॰एक करके , इन सभी साथियों ने साहस के साथ  बहादुरी  दिखाई। वे सब इमाम हुसैन (अ.स. ) के नज़दीने यह साबित किया कि अपने इमाम के लिए जान देने को तैयार हैं। 3ণনী সান उन्होंने कुर्बान कर दी, जिससे मैदान ए॰कर्बला शहादतों से भर गया। इमाम हुसैन (अ.स. ) की शहादत (वफा/सजदा): जब इमाम हुसैन (अ.स. ) अकेले रह गए, तो वे भी मैदान में उतरे। वे जानते थे कि उनकी शहादत तय है, लेकिन उन्होंने अपने से उसूलों  समझौता नहीं किया। वे अंरक अपने दीन (इस्लाम ) की रक्षा के लिए लड़ते रहे। (अ.स. ) बुरी तरह जख्मी हो गए सजदे की हालतः जब इमाम 87 और गिर पडे़, तो उस आखिरी घड़ी में भी उन्होंने अल्लाह के सामने सिर झुकाय। जिस समय वे अल्लाह के हुजूर (सजदे में ) नमाज़ पढ़ रहे थे, हालत में उन पर हमला किया गया और उन्हें शहीद कर दिया गया। 26 5/7 (आशूरा ) के दिन की घटनाएँ 10 मुहर्रम १. अंतिम जंग (शहादत की शुरुआत): सुबह की नमाज़ के बाद, यज़ीद की हज़ारों की फौज ने हमला शुरू किया। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स. ) के साथ केवल ७२ लोग थे (जिनमें उनके परिवार के सदस्य और वफादार साथी शामिल थे)। एक॰एक करके , इन सभी साथियों ने साहस के साथ  बहादुरी  दिखाई। वे सब इमाम हुसैन (अ.स. ) के नज़दीने यह साबित किया कि अपने इमाम के लिए जान देने को तैयार हैं। 3ণনী সান उन्होंने कुर्बान कर दी, जिससे मैदान ए॰कर्बला शहादतों से भर गया। इमाम हुसैन (अ.स. ) की शहादत (वफा/सजदा): जब इमाम हुसैन (अ.स. ) अकेले रह गए, तो वे भी मैदान में उतरे। वे जानते थे कि उनकी शहादत तय है, लेकिन उन्होंने अपने से उसूलों  समझौता नहीं किया। वे अंरक अपने दीन (इस्लाम ) की रक्षा के लिए लड़ते रहे। (अ.स. ) बुरी तरह जख्मी हो गए सजदे की हालतः जब इमाम 87 और गिर पडे़, तो उस आखिरी घड़ी में भी उन्होंने अल्लाह के सामने सिर झुकाय। जिस समय वे अल्लाह के हुजूर (सजदे में ) नमाज़ पढ़ रहे थे, हालत में उन पर हमला किया गया और उन्हें शहीद कर दिया गया। 26 - ShareChat