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#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती २०२६ पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को हिन्दु " सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती मनायी जाती है। यह दिन देवी सिद्धिलक्ष्मी  प्राकट्य की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। देवी सिद्धिलक्ष्मी को द्वादश  ম পুতা  सिद्धिविद्या देवियों में से एक रूप जाता है। देवी सिद्धिलक्ष्मी की करने से लक्ष्मी, अर्थात् धन सम्पत्ति एवं सिद्धि प्राप्त होती है। आराधना कौल सिद्ध धर्म के अनुसार सिद्धिलक्ष्मी नाम दो शब्दों, सिद्धि एवं लक्ष्मी के निर्मित हुआ ` है। सिद्धि का तात्पर्य प्रत्येक कार्य में पूर्णता अथवा 74177 सफलता से है तथा लक्ष्मी का अर्थ है धन सम्पदा, अतः देवी का यह दिव्य Rfe एवं समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इसके स्वरूप कार्य से उद्धृत  अतिरिक्त विद्वानों का मत है कि लक्ष्मी शब्द है जिसका 'লঃয" अर्थ है उद्देश्य अथवा तन्त्र की भाषा में , लक्ष्य का अर्थ है सार। अतः मान्यताओं के अनुसार देवी माँ अपने भक्तों को धन एवं पूर्णता दोनों प्रदान करती हैं। धर्मग्रन्थों में देवी सिद्धिलक्ष्मी को अष्टलक्षणा कहा गया है। अष्टलक्षणा, समृद्धियाँ प्राप्त अर्थात् वे देवी, जिनकी आराधना करने से आठ प्रकार की होती हैं, धन, धान्य, पुत्र, आरोग्य, ज्ञान, सौभाग्य, विजय तथा मोक्ष। सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती के दिन देवी माँ के निमित्त किया गया जप, हवन, दान अथवा उपवास सहस्र गुणा फल प्रदान किया करता है। देवी सिद्धिलक्ष्मी के पूजन से साधक को लौकिक एवं पारलौकिक दोनों प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। इस दिन भक्तिपूर्वक श्री सूक्त एवं श्रीलक्ष्मी सहस्रनाम आदि का पाठ करने से अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है। सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती २०२६ पञ्चाङ्ग के अनुसार वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को हिन्दु " सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती मनायी जाती है। यह दिन देवी सिद्धिलक्ष्मी  प्राकट्य की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है। देवी सिद्धिलक्ष्मी को द्वादश  ম পুতা  सिद्धिविद्या देवियों में से एक रूप जाता है। देवी सिद्धिलक्ष्मी की करने से लक्ष्मी, अर्थात् धन सम्पत्ति एवं सिद्धि प्राप्त होती है। आराधना कौल सिद्ध धर्म के अनुसार सिद्धिलक्ष्मी नाम दो शब्दों, सिद्धि एवं लक्ष्मी के निर्मित हुआ ` है। सिद्धि का तात्पर्य प्रत्येक कार्य में पूर्णता अथवा 74177 सफलता से है तथा लक्ष्मी का अर्थ है धन सम्पदा, अतः देवी का यह दिव्य Rfe एवं समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। इसके स्वरूप कार्य से उद्धृत  अतिरिक्त विद्वानों का मत है कि लक्ष्मी शब्द है जिसका 'লঃয" अर्थ है उद्देश्य अथवा तन्त्र की भाषा में , लक्ष्य का अर्थ है सार। अतः मान्यताओं के अनुसार देवी माँ अपने भक्तों को धन एवं पूर्णता दोनों प्रदान करती हैं। धर्मग्रन्थों में देवी सिद्धिलक्ष्मी को अष्टलक्षणा कहा गया है। अष्टलक्षणा, समृद्धियाँ प्राप्त अर्थात् वे देवी, जिनकी आराधना करने से आठ प्रकार की होती हैं, धन, धान्य, पुत्र, आरोग्य, ज्ञान, सौभाग्य, विजय तथा मोक्ष। सिद्धिलक्ष्मी जयन्ती के दिन देवी माँ के निमित्त किया गया जप, हवन, दान अथवा उपवास सहस्र गुणा फल प्रदान किया करता है। देवी सिद्धिलक्ष्मी के पूजन से साधक को लौकिक एवं पारलौकिक दोनों प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। इस दिन भक्तिपूर्वक श्री सूक्त एवं श्रीलक्ष्मी सहस्रनाम आदि का पाठ करने से अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है। - ShareChat