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Ghav ka naam sunkar chale jate hai rishtedar #shadi #dhashan River #sagar
shadi - की जमीन चली गई तो लगा कि किस्मत का लिखा पुरखों ' है, लेकिन अब बेटों की शादियां भी रुक गईं। लोग रिश्ता लेकर आते हैं, गांव का नाम पूछते हैं और जैसे ही पता है कि सलैया खुर्द डूब में आ रहा है, मना कर देते चलता हैं। कहते हैं- बेटी को बेघर होने के लिए थोड़े ही ब्याहेंगे। 99 यह दर्द सलैया खुर्द के विस्थापित देवसिंह राजपूत का है। उल्दन बांध परियोजना की आ रहे इस गांव में विस्थापन सिर्फ घर डूब में और जमीन खोने का नहीं है। यहां माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता बेटों की शादी है। पिछले चार साल में गांव से एक भी बारात नहीं निकली। ४० घरों के इस गांव में १५ से ज्यादा युवक शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन रिश्ते नहीं हो पा रहे। वजह सिर्फ एक है - गांव का डूब क्षेत्र में होना। दरअसल, सागर जिले के बंडा विकासखंड में धसान नदी पर उल्दन बांध का निर्माण अंतिम चरण में है। इसी बारिश से बांध में पानी भरना शुरू किया जाएगा और सलैया खुर्द पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ जाएगा | परियोजना से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और सैकड़ों गांवों को पानी मिलेगा , लेकिन इसके साथ ही सलैया खुर्द के लोग अपने घर, खेत और वर्षों पुरानी बसाहट छोड़ने को मजबूर हैं। डूब का असर केवल विस्थापन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव लोगों के सामाजिक जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ रहा है। की जमीन चली गई तो लगा कि किस्मत का लिखा पुरखों ' है, लेकिन अब बेटों की शादियां भी रुक गईं। लोग रिश्ता लेकर आते हैं, गांव का नाम पूछते हैं और जैसे ही पता है कि सलैया खुर्द डूब में आ रहा है, मना कर देते चलता हैं। कहते हैं- बेटी को बेघर होने के लिए थोड़े ही ब्याहेंगे। 99 यह दर्द सलैया खुर्द के विस्थापित देवसिंह राजपूत का है। उल्दन बांध परियोजना की आ रहे इस गांव में विस्थापन सिर्फ घर डूब में और जमीन खोने का नहीं है। यहां माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता बेटों की शादी है। पिछले चार साल में गांव से एक भी बारात नहीं निकली। ४० घरों के इस गांव में १५ से ज्यादा युवक शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन रिश्ते नहीं हो पा रहे। वजह सिर्फ एक है - गांव का डूब क्षेत्र में होना। दरअसल, सागर जिले के बंडा विकासखंड में धसान नदी पर उल्दन बांध का निर्माण अंतिम चरण में है। इसी बारिश से बांध में पानी भरना शुरू किया जाएगा और सलैया खुर्द पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ जाएगा | परियोजना से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और सैकड़ों गांवों को पानी मिलेगा , लेकिन इसके साथ ही सलैया खुर्द के लोग अपने घर, खेत और वर्षों पुरानी बसाहट छोड़ने को मजबूर हैं। डूब का असर केवल विस्थापन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव लोगों के सामाजिक जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ रहा है। - ShareChat