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✨ क्या आप जानते हैं कि महाभारत की माता सत्यवती एक मछुआरे की नहीं, बल्कि एक प्रतापी राजा की पुत्री थीं? ✨ हम में से अधिकांश लोग यही जानते हैं कि सत्यवती दाशराज की पुत्री थीं, लेकिन महाभारत के आदिपर्व (अंशअवतरणपर्व, अध्याय ६३) में उनके जन्म का एक ऐसा दिव्य रहस्य छिपा है, जो बहुत कम लोग जानते हैं! 🙏 आइए जानते हैं माता सत्यवती (मत्स्यगंधा) के जन्म की पूरी पावन कथा: 🔹 देवराज इंद्र का वरदान और राजा उपरिचर वसु: पूर्वकाल में चेदि देश के परम प्रतापी राजा हुए—वसु। आकाशगामी दिव्य विमान पर रहने के कारण उनका नाम 'उपरिचर' पड़ा। उन्हें इंद्र से एक अभेद्य वैजयंती माला और सुरक्षा करने वाली दिव्य बांस की छड़ी मिली थी, जिसकी याद में आज भी इंद्रोत्सव मनाया जाता है। 🔹 नदी और पर्वत की संतानें: राजा उपरिचर की पत्नी गिरिका थीं, जो शुक्तिमती नदी और कोलाहल पर्वत की पुत्री थीं। इनके ज्येष्ठ पुत्र बृहद्रथ आगे चलकर मगध के राजा बने (जिनके पोते महाबली जरासंध थे)। 🔹 एक श्राप और यमुना का चमत्कार: एक बार राजा उपरिचर का वीर्य एक बाज के माध्यम से ले जाते समय यमुना नदी में गिर गया। वहाँ ब्रह्मा जी के श्राप वश मछली बनी एक अप्सरा रहती थी, जिसने उसे निगल लिया। जब मल्लाहों ने उस मछली को पकड़ा और उसका उदर चीरा, तो उसमें से एक अत्यंत सुंदर कन्या और एक बालक उत्पन्न हुए! 🔹 मत्स्यगंधा से योजनगंधा बनने का सफर: राजा उपरिचर ने बालक को अपने पास रख लिया (जो आगे चलकर राजा मत्स्य बने) और मछली की गंध आने के कारण उस कन्या को दाशराज (मल्लाहों के राजा) को सौंप दिया। यही कन्या आगे चलकर 'सत्यवती' कहलाईं। बाद में महर्षि पराशर के आशीर्वाद से उनके शरीर की गंध १ योजन तक फैलने वाली दिव्य सुगंध में बदल गई और वे 'योजनगंधा' कहलाईं। इन्ही के गर्भ से सनातन धर्म के स्तंभ महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ! #महाभारत
महाभारत - महाभारत आदिपर्व ६३वे अध्याय उपरिचर वसु देवराज इंद्र राजा वेजयंती इंद्न प्रदत माला dqda নামব্বপতা विव्य विमान दिव्य विमान 4 ಹsrina Yadu' साहाराय ynum೯' Brhadratha Pratyagraha Kushamba  ನ್ವ స్డే Shyena ಸ್ಹ 4 క్లే ఇ్ష 1 रानी থুনিনমনী = गिरिका 9 3IS3I कोलाहल पर्वत मीनरूपसें ಸ್ನ यमुना नदी GNIu 4 u@IB UUIIUNT பIபI दिव्व सुर्गंध Hल्लाढ महर्पि पराशर Heff व्यास योजनर्गया राजा उपरिचर वसु एवं सत्यवती का दिव्य जन्म महाभारत आदिपर्व ६३वे अध्याय उपरिचर वसु देवराज इंद्र राजा वेजयंती इंद्न प्रदत माला dqda নামব্বপতা विव्य विमान दिव्य विमान 4 ಹsrina Yadu' साहाराय ynum೯' Brhadratha Pratyagraha Kushamba  ನ್ವ స్డే Shyena ಸ್ಹ 4 క్లే ఇ్ష 1 रानी থুনিনমনী = गिरिका 9 3IS3I कोलाहल पर्वत मीनरूपसें ಸ್ನ यमुना नदी GNIu 4 u@IB UUIIUNT பIபI दिव्व सुर्गंध Hल्लाढ महर्पि पराशर Heff व्यास योजनर्गया राजा उपरिचर वसु एवं सत्यवती का दिव्य जन्म - ShareChat