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#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
शुभ मुहूर्त - 12-06-26 शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार शास्त्रों में प्रदोष व्रत को सर्वसुख प्रदान करने के साथ ही परम कल्याणकारी व्रत बताया गया है। इस दिन प्रदोष काल में शिव परिवार की पूजा,  शिवलिंग अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और ऊँठ नमः शिवाय मंत्र का यथा-शक्ति जाप करना चाहिए। ऊँ नमः शिवाय शुक्र प्रदोष व्रतः १२ जून २०२६, शुक्रवार সতীণ দুতা যসয: থাস 07:36 যী যান 09:20 ব্রতী নব্ধ ज्येष्ठ अधिकमास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। प्रदोष काल, यानी शिव पूजा के लिए विशेष शुभ माना गया है। के बाद का समय, सूर्यास्त इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। संध्या समय पूजा स्थल को शुद्ध कर शिवलिंग पर जल, दूध , दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक और पुष्प करें। भगवान शिव को बेलपत्र , धतूरा, शमी पत्र, चंदन, अक्षत अर्पित करें। इस दिन पूजा के समय ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप एवं शिव चालीसा और में पूजा ` प्रदोष व्रत कथा का पाठ भी अति शुभ माना गया है। प्रदोष काल के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करनी चाहिए। 12-06-26 शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार शास्त्रों में प्रदोष व्रत को सर्वसुख प्रदान करने के साथ ही परम कल्याणकारी व्रत बताया गया है। इस दिन प्रदोष काल में शिव परिवार की पूजा,  शिवलिंग अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और ऊँठ नमः शिवाय मंत्र का यथा-शक्ति जाप करना चाहिए। ऊँ नमः शिवाय शुक्र प्रदोष व्रतः १२ जून २०२६, शुक्रवार সতীণ দুতা যসয: থাস 07:36 যী যান 09:20 ব্রতী নব্ধ ज्येष्ठ अधिकमास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। प्रदोष काल, यानी शिव पूजा के लिए विशेष शुभ माना गया है। के बाद का समय, सूर्यास्त इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। संध्या समय पूजा स्थल को शुद्ध कर शिवलिंग पर जल, दूध , दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक और पुष्प करें। भगवान शिव को बेलपत्र , धतूरा, शमी पत्र, चंदन, अक्षत अर्पित करें। इस दिन पूजा के समय ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप एवं शिव चालीसा और में पूजा ` प्रदोष व्रत कथा का पाठ भी अति शुभ माना गया है। प्रदोष काल के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करनी चाहिए। - ShareChat