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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - क्या मेरे . अंगना की मिट्टी आई हे जरा दिखाना तो देखूं जरा किस पते पर चिट्ठी आई है.. ? यह केसी सौंधी सौंधी सुगंध आ रही हे जेसे मेरी माँ के गजरे की महक आ रही हे क्या मेरे.. बगिया की फुलवा आई है जरा दिखाना तो देखूं जरा किस पते पर चिट्ठी आई है..? यह कैसी रस में घुली बोली आ रही है जेसे मेरे हम मित्रों की टोली आ रही हे क्या मेरे . छज्जे की चिड़िया आई हे rदिखाना तो देखूं जरा பI किस पते पर चिट्ठी आई हे..? यह केसी प्रेम में पगी मिठास आ रही हे जेसे याद घर की आज मुझे बुला रही है क्या मेरे . चौखट की आहट आई है दिखाना तो देखूं जरा जरा किस पते पर चिट्ठी आई है..? यह कैसी मधुर धुन यह रोकर गा रही हैे जैसे अपनों से दूरी का दुख जता रही हैे बहुत दिन हुए मिले भी तो " इसलिए. जरूर मेरे .. ही घर की अब नींव आई हे जरा दिखाना तो देखूं जरा गोर से किस शिकायत की यह फरमाइश लाई हे !! स्वाती छीपा क्या मेरे . अंगना की मिट्टी आई हे जरा दिखाना तो देखूं जरा किस पते पर चिट्ठी आई है.. ? यह केसी सौंधी सौंधी सुगंध आ रही हे जेसे मेरी माँ के गजरे की महक आ रही हे क्या मेरे.. बगिया की फुलवा आई है जरा दिखाना तो देखूं जरा किस पते पर चिट्ठी आई है..? यह कैसी रस में घुली बोली आ रही है जेसे मेरे हम मित्रों की टोली आ रही हे क्या मेरे . छज्जे की चिड़िया आई हे rदिखाना तो देखूं जरा பI किस पते पर चिट्ठी आई हे..? यह केसी प्रेम में पगी मिठास आ रही हे जेसे याद घर की आज मुझे बुला रही है क्या मेरे . चौखट की आहट आई है दिखाना तो देखूं जरा जरा किस पते पर चिट्ठी आई है..? यह कैसी मधुर धुन यह रोकर गा रही हैे जैसे अपनों से दूरी का दुख जता रही हैे बहुत दिन हुए मिले भी तो " इसलिए. जरूर मेरे .. ही घर की अब नींव आई हे जरा दिखाना तो देखूं जरा गोर से किस शिकायत की यह फरमाइश लाई हे !! स्वाती छीपा - ShareChat