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#जो मन लागै रामचरन अस।
जो मन लागै रामचरन अस। - जो मन लागै र्रमचरन अस| देह गेह सुत बितःकलत्र महॅसगन होत fr जतन [;mral द्वंद्वरहित गतमाज साग स्तबिषय बिरत खटाइ नानाकंस। १२ ११ सुखनिधान सुजान कोसलपति ह्वै प्रसन्न कहु क्यों न होहिं बसIl सर्बभूताहित निर्ब्यलीक चित भगति प्रेम दृढ़ नेम एकरस। तुलसीदास यह होइ तबहि जब द्रवै ईस जेहि हतो sics নংII जो मन लागै र्रमचरन अस| देह गेह सुत बितःकलत्र महॅसगन होत fr जतन [;mral द्वंद्वरहित गतमाज साग स्तबिषय बिरत खटाइ नानाकंस। १२ ११ सुखनिधान सुजान कोसलपति ह्वै प्रसन्न कहु क्यों न होहिं बसIl सर्बभूताहित निर्ब्यलीक चित भगति प्रेम दृढ़ नेम एकरस। तुलसीदास यह होइ तबहि जब द्रवै ईस जेहि हतो sics নংII - ShareChat