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**धुरबे हाथी की कहानी: नेपाल में इंसान-वन्यजीव संघर्ष**
नेपाल के चितवन नेशनल पार्क क्षेत्र में रहने वाला नर हाथी **धुरबे** पिछले कई वर्षों से मानव-वन्यजीव संघर्ष का सबसे चर्चित उदाहरण बन गया है। अधिकारियों के अनुसार, वह कम से कम **25 लोगों की मौत** और **50 से ज्यादा घरों** के नुकसान के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
2012 में धुरबे ने मादी गाँव के पास शनिचरा बोते के माता-पिता बूढ़ीराम और झराली बोते को कुचलकर मार डाला था। परिवार ने डर के मारे अपना सामान बेचकर रेउ और राप्ती नदियों को पार कर लगभग 9-17 किमी दूर जगतपुर में नया घर बसाया।
लेकिन 4 जुलाई 2026 को धुरबे ने उनके नए घर में घुसकर शनिचरा की 25 वर्षीय बहू **अशिका बोते** और 4 वर्षीय पोते **भरत बोते** को मार डाला। इस तरह एक ही परिवार में इस हाथी के कारण 14 वर्षों में चार मौतें हो चुकी हैं।
पार्क अधिकारियों ने कई बार धुरबे को पकड़ने या मारने की कोशिश की, 2012 में तो आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन वह बार-बार घायल होने के बावजूद बच निकलता रहा। वर्तमान में सैटेलाइट कॉलर से उसकी निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यक्तिगत बदला नहीं, बल्कि हाथी की तेज स्मृति और लगातार घटते आवास के कारण है।
यह घटना नेपाल में बढ़ते इंसान-वन्यजीव संघर्ष की भयावह मिसाल बन गई है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
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