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दोहा #✒ शायरी नीरज
✒ शायरी - दाहा बुरे दिनों में कर नहीं कभी किसी से आस। परछाई भी साथ दे, जिब तक रहे प्रकाश।| नीरज दाहा बुरे दिनों में कर नहीं कभी किसी से आस। परछाई भी साथ दे, जिब तक रहे प्रकाश।| नीरज - ShareChat