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Qur'an 8/62,63 (2) #points to ponder #सोचने वाली बात #islam guide us in every field of life #📕 કુરાન #Quran and We
points to ponder - (शाति) का आर झुक, ता तुम भी उसकी ओर झुक जाओ और अल्लाह पर भरोसा रखो। बेशक, वाला और सब सुनने वह सब कुछ कुछ जानने वाला है।" *आयत 8:62* "और यदि वे तुम्हें धोखा देना > लिए चाहें, तो तुम्हारे  अल्लाह ही काफी है। वही तो है जिसने अपनी मदद से और मोमिनों (ईमान वालों) के ज़रिए तुम्हें शक्ति दी।" ### *মধিদ মনঞ্ (Context):* ये आयतें संतुलन की बात करती हैं। एक तरफ यह * आत्मरक्षा और तैयारी* का संदेश देती हैं ताकि शांति बनी रहे और कोई कमजोरी का फायदा न उठाए, वहीं दूसरी तरफ यह स्पष्ट निर्देश देती हैं कि यदि शत्रु *शांति का हाथ बढ़ाए*, तो उसे स्वीकार चाहिए और अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। रखना 9:48 am (शाति) का आर झुक, ता तुम भी उसकी ओर झुक जाओ और अल्लाह पर भरोसा रखो। बेशक, वाला और सब सुनने वह सब कुछ कुछ जानने वाला है।" *आयत 8:62* "और यदि वे तुम्हें धोखा देना > लिए चाहें, तो तुम्हारे  अल्लाह ही काफी है। वही तो है जिसने अपनी मदद से और मोमिनों (ईमान वालों) के ज़रिए तुम्हें शक्ति दी।" ### *মধিদ মনঞ্ (Context):* ये आयतें संतुलन की बात करती हैं। एक तरफ यह * आत्मरक्षा और तैयारी* का संदेश देती हैं ताकि शांति बनी रहे और कोई कमजोरी का फायदा न उठाए, वहीं दूसरी तरफ यह स्पष्ट निर्देश देती हैं कि यदि शत्रु *शांति का हाथ बढ़ाए*, तो उसे स्वीकार चाहिए और अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। रखना 9:48 am - ShareChat