Vijay Dass
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क्या वेद बता सकते हैं भगवान कौन है?
जी हाँ, और जवाब है कबीर साहेब!
ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 93, मंत्र 2 प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा कभी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेता, वह शिशु रूप में प्रकट होता है। वही कबीर साहेब हैं।
"कबीर साहेब प्रकट दिवस" वह पावन दिन है, जब सर्व ब्रह्मांडों के रचनहार स्वयं कबीर परमेश्वर सत्यलोक से चलकर, हम भटकती हुई जीवात्माओं को तारने के लिए पृथ्वी पर सशरीर अवतरित हुए।
पांच तत्त्व की देह ना मेरी, ना कोई माता जाया।
जीव उदारन तुम को तारन, सीधा जग में आया।।
ना मेरा जन्म, ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा तहाँ जुलाहे ने पाया।
ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र 3 में स्पष्ट उल्लेख है कि परमात्मा का जन्म नहीं होता वह सशरीर प्रकट होता है, और वही परमेश्वर कबीर जी हैं। जिनका जन्म नहीं, सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसी सत्य के प्रमाण स्वरूप 629वां कबीर साहेब प्रकट दिवस, संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में 27, 28 व 29 जून को मनाया जा रहा है।
गरीब, साहिब पुरुष कबीर कूँ, जन्म लिया नहीं कोय।
शब्द स्वरूपी रूप है, घट घट बोलै सोय।।
ज्येष्ठ पूर्णिमा, विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) की ब्रह्म मुहूर्त की वह घड़ी जब कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर चलकर लहरतारा तालाब के कमल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। उसी पावन घड़ी की स्मृति में संत रामपाल जी महाराज की उपस्थिति में 629वां प्रकट दिवस 27, 28 व 29 जून को मनाया जा रहा है।
जिनका नहीं जन्म का कोई प्रमाण, वह है कबीर भगवान
आज से लगभग 600 वर्ष पहले, काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर परमेश्वर कबीर जी का सशरीर प्राकट्य हुआ था। इसके जीवंत साक्ष्य आज भी लहरतारा तालाब, काशी में विद्यमान हैं। संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में कबीर साहेब प्रकट दिवस, 27-29 जून को भव्य रूप से मनाया जा रहा है। आइए, सब मिलकर इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनें। #sant ram pal ji maharaj #me follow
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