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✍️ साहित्य एवं शायरी - दाँत कितने भी तेज़ क्यों न हों , तुम्हारे  पर तुम पानी को नहीं काट सकते। दाँत कितने भी तेज़ क्यों न हों , तुम्हारे  पर तुम पानी को नहीं काट सकते। - ShareChat