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#गुलज़ार शायरी #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
गुलज़ार शायरी - ये दबदबा ये रुतबा ये नशा ये दौलत सब किरायेदार है साहब घर बदलते रहते हैं Cooo moraing गलजार 00ا H4ue ^ grenl ' aheao ये दबदबा ये रुतबा ये नशा ये दौलत सब किरायेदार है साहब घर बदलते रहते हैं Cooo moraing गलजार 00ا H4ue ^ grenl ' aheao - ShareChat