vk
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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
यदि ब्राह्मण वर्चस्ववादी होता तो क्या हजारों वर्षों से रावण दहन को जारी रहने देता था ? क्या वह वेदव्यास,वाल्मिकी,सन्त कबीर,संत रैदास,रहीम,रसखान जैसे गैर ब्राह्मणों को महानता के शिखर पर बैठने देता ? क्या वह किसी क्षत्रिय और यदुवंशी को भगवान बनाकर महिमामंडन करता ? सत्य यह है ब्राह्मणों ने हमेशा विद्या अध्ययन को प्राथमिकता दी और प्रतिभा को निखारने का काम किया ! वेदों और उपनिषदों को कंठस्थ कर यत्न पूर्वक उनको आज तक बचाकर रखा है ! आधुनिक युग मे भी तमाम सहायताएं मिलने के बाद भी कुछ वर्गों के बच्चे पढाई लिखाई के प्रति गंभीर नहीं दिखते लेकिन ब्राह्मण वर्ग ने गरीबी और विषम से विषम परिस्थितियों मे भी शिक्षा से कभी मुंह नहीं मोड़ा ! रावण का पुतला जलाया जाना ब्राह्मणों की न्याय संगत नीति का प्रमाण हैं ! उन्हें बदनाम मत कीजिए ! उनसे शिक्षा के प्रति समर्पित रहना सीखिए ! उनसे ज्ञानार्जन के लिए त्याग करना और एकाग्रचित होना सीखिए ! रही बात शिक्षा व्यवस्था पर काबिज होने की तो यदि यह बात सच होती तो सारी रचनाएं, सभी शंकराचार्य और सारे भगवान सिर्फ ब्राह्मण परिवारों के नाम से होते ! लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है !
इसलिए निम्न स्तरीय मानसिकता का त्याग कीजिए ! और अपनी सोच को विस्तार दीजिए !
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