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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अपने बड़ों को स्वादिष्ट भोजन दीजिए या मत दीजिए लेकिन दीजिए ! सम्मान अवश्य अपने बड़ों को स्वादिष्ट भोजन दीजिए या मत दीजिए लेकिन दीजिए ! सम्मान अवश्य - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - यदि श्रीराम सीता माता की अग्नि परीक्षा न लेते तो सत्य सिद्ध कर यह संसार उस धोबी की बात को बार २ सीता का नाम लेकर संपूर्ण स्त्री समाज का चरित्र हनन करता होता ! राम के एक कठोर निर्णय ने सीता को महानता और समस्त स्त्री जाति के पुरूषों पर श्रेष्ठता प्रदान किया 3k মম্সান ব্ী सीता ने राम का सम्मान करते हुए अपने त्याग से स्त्री वंश को गरिमा के सर्वोच्च शिखर पर प्रतिष्ठित ক্িয়া इसी के परिणाम स्वरूप भारतवर्ष के पुरूष प्रधान समाज मे स्त्री समुदाय के स्वतंत्रता की दीर्घकालिक सुरक्षा और सम्मान एवं उस धोबी मन पुरूष वर्ग के अत्याचारी स्वभाव पर स्थाई रूप से अंकुश लगना संभव हुआ यदि श्रीराम सीता माता की अग्नि परीक्षा न लेते तो सत्य सिद्ध कर यह संसार उस धोबी की बात को बार २ सीता का नाम लेकर संपूर्ण स्त्री समाज का चरित्र हनन करता होता ! राम के एक कठोर निर्णय ने सीता को महानता और समस्त स्त्री जाति के पुरूषों पर श्रेष्ठता प्रदान किया 3k মম্সান ব্ী सीता ने राम का सम्मान करते हुए अपने त्याग से स्त्री वंश को गरिमा के सर्वोच्च शिखर पर प्रतिष्ठित ক্িয়া इसी के परिणाम स्वरूप भारतवर्ष के पुरूष प्रधान समाज मे स्त्री समुदाय के स्वतंत्रता की दीर्घकालिक सुरक्षा और सम्मान एवं उस धोबी मन पुरूष वर्ग के अत्याचारी स्वभाव पर स्थाई रूप से अंकुश लगना संभव हुआ - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - खुद को एक छोटा सा कांटा भी चुभ जाए तो बहुत लेकिन निर्दोषों की जान लेने मे रत्ती दर्द होता है भर भी संकोच नहीं होता ! स्वाद के लिए जीव हत्या, अनावश्यक इच्छाओं के लिए जंगलों और पहाड़ों की लिए रिश्तों और मानवता की हत्या రెగ स्वार्थ हत्या, छल ्कपट और पाप की पराकाष्ठा की परिणिति होते हैं भुगतान सभी को करना पड़ता है ! गेंहू के साथ युद्ध घुन भी पिसता है ! खुद को एक छोटा सा कांटा भी चुभ जाए तो बहुत लेकिन निर्दोषों की जान लेने मे रत्ती दर्द होता है भर भी संकोच नहीं होता ! स्वाद के लिए जीव हत्या, अनावश्यक इच्छाओं के लिए जंगलों और पहाड़ों की लिए रिश्तों और मानवता की हत्या రెగ स्वार्थ हत्या, छल ्कपट और पाप की पराकाष्ठा की परिणिति होते हैं भुगतान सभी को करना पड़ता है ! गेंहू के साथ युद्ध घुन भी पिसता है ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - की बातें सुनकर जल्दी प्रभाव दूसरों अक्सर मे आ जाते हाो! कभी कभी शांत होकर अपनी अंतरात्मा की भी बातें सुन लिया करो ! यह उसी की आवाज होती है जिसके सामने तुम सज़दा करते हो ! जिसे खुश करने के लिए तुम घी के दिए जलाते हो जिससे जिंदगीभर की खुशियां मांगते हो ! उसकी नहीं सुनोगे तो खुश कैसे रहोगे ? की बातें सुनकर जल्दी प्रभाव दूसरों अक्सर मे आ जाते हाो! कभी कभी शांत होकर अपनी अंतरात्मा की भी बातें सुन लिया करो ! यह उसी की आवाज होती है जिसके सामने तुम सज़दा करते हो ! जिसे खुश करने के लिए तुम घी के दिए जलाते हो जिससे जिंदगीभर की खुशियां मांगते हो ! उसकी नहीं सुनोगे तो खुश कैसे रहोगे ? - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - १५० करोण की आबादी को संभालने वाले राष्ट्र में जमाखोरी कालाबजारी और भ्रष्टाचार को देश द्रोह नहीं माना जाता !? इससे अधिक स्वतंत्रता और इससे बढकर आश्चर्य भला और क्या हो सकता है !? १५० करोण की आबादी को संभालने वाले राष्ट्र में जमाखोरी कालाबजारी और भ्रष्टाचार को देश द्रोह नहीं माना जाता !? इससे अधिक स्वतंत्रता और इससे बढकर आश्चर्य भला और क्या हो सकता है !? - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - भारत के १५० करोण लोगों को सिर्फ १५ लोग लड़वा सकते हैं ! सिर्फ उन्हें किसी मंच से बोलना भर आना चाहिए ! उकसा कर खुद क्यों छिप जाते हैं चो जो जनसेवक हैं ? दंगे मे मरने वाले किसी नेता के रिश्तेदार क्यों नहीं होते ? अच्छा वक्ता होना ईश्वर का वरदान है ! नकारात्मक और उकसावे चाले वक्तव्य देना उस वरदान का दुरूपयोग है ! और किसी के उकसावे मे आ जाना सिर्फ मूर्खता नहीं महानमूर्खता है ! भारत के १५० करोण लोगों को सिर्फ १५ लोग लड़वा सकते हैं ! सिर्फ उन्हें किसी मंच से बोलना भर आना चाहिए ! उकसा कर खुद क्यों छिप जाते हैं चो जो जनसेवक हैं ? दंगे मे मरने वाले किसी नेता के रिश्तेदार क्यों नहीं होते ? अच्छा वक्ता होना ईश्वर का वरदान है ! नकारात्मक और उकसावे चाले वक्तव्य देना उस वरदान का दुरूपयोग है ! और किसी के उकसावे मे आ जाना सिर्फ मूर्खता नहीं महानमूर्खता है ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - सिर्फ खुद तू ही हो F 3TTT सकता है क्यों बाकी सबके लिए तू वक्त पर काम आने की जिस दिन तू उसपर उम्मीद है ! | खरा नहीं उतरा उसी दिन से उन्हें नफरत हो जाएगी ! तेरी तुझसे पिछली सारी अच्छाइयां वो भूल चुके होंगे ! और यह किसी भी वक्त हो सकता है ! सिर्फ खुद तू ही हो F 3TTT सकता है क्यों बाकी सबके लिए तू वक्त पर काम आने की जिस दिन तू उसपर उम्मीद है ! | खरा नहीं उतरा उसी दिन से उन्हें नफरत हो जाएगी ! तेरी तुझसे पिछली सारी अच्छाइयां वो भूल चुके होंगे ! और यह किसी भी वक्त हो सकता है ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - भारतीय रेलवे यात्रियों की और अधिक सहूलियत के लिए आप कृपा करके सीट नंबर के साथ-साथ आने वाले स्टेशन का नाम भी डिस्प्ले करें ! धन्यवाद भारतीय रेलवे यात्रियों की और अधिक सहूलियत के लिए आप कृपा करके सीट नंबर के साथ-साथ आने वाले स्टेशन का नाम भी डिस्प्ले करें ! धन्यवाद - ShareChat
वसुधैव-कुटुंबकम संपूर्ण धरा एक घर-संपूर्ण जीव एक परिवार! यही तो है भारत-दर्शन! यदि इस स्लोगन की तह तक जाया जाए तो इसमे अनंत ब्रह्मांड की तरह ही अनंत अध्यात्मिक जगत के भीतर नीहित विस्तृत विज्ञान की जटिलताओं का सहज-सरल-स्वच्छ लेकिन पारदर्शी गुफाओं का वृहद जाल दृश्यमान होता है ! जो बाहर से अलग-अलग किंतु अंदर से एकाण्वित है ! अर्थात मूल रूप से एक अणु पर केंद्रित है ! जो कि एक परमाणु मात्र के परिवर्तन से अपना स्वरूप बदलने मे निरंतर तत्पर है ! जल चक्र, खाद्य चक्र एवं जीवन चक्र जैसे अनंत अज्ञात पारिस्थितिकीय तंत्र एक-दूसरे को संतुलन प्रदान करते हैं तब जाकर कहीं हमारी पृथ्वी पर सृष्टि आकार लेती है ! हमारे पूर्वजों ने जब अपने संपूर्ण अनुसंधानों और अध्ययनों को मिलाकर एक निष्कर्ष निकाला तो जो सूत्र निकला वह 'वसुधैव-कुटुंबकम' है ! आज समूचे विश्व मे अनगिनत विद्यालय एवं विश्व विद्यालय संचालन मे हैं लेकिन उनकी शिक्षा हर बार सिर्फ अशांति और युद्ध का प्रारूप तैयार करती है ! क्योंकि इसमे सिर्फ अज्ञान है विज्ञान नहीं ! लेकिन हमारा भारतवर्ष लाखों वर्षों से सिर्फ इसीलिए सिमटता रहा है कि हमारे पास सनातन का विज्ञान है ! हम सृष्टि और जीवन का महत्व भलिभांति जानते हैं इसलिए हम हिंसा के अतिरिक्त विचार करते हैं ! और इसीलिए हमारे पास त्यौहारों का गुलदस्ता है ! जिसके अलग-अलग फूलों की महक जीवन की सुंदरता से मानवता का मिलाप कराती है ! निश्चय ही विश्व जगत को भारतीयों से जीवन जीना सीखना चाहिए! आज भारत-दर्शन ही समस्त संसारवासियों की प्रथम आवश्यक्ता है ! #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
यात्रि-गण कृप्या ध्यान दें, किसी यात्रा के लिए निकलने से पूर्व अपने प्रत्येक बैग मे अपना पता लिखित पर्चा अवश्य डालकर रखें ! साथ ही एक निवेदन भी कि यदि यह सामान आप जाने-अन्जाने अपने साथ ले जा रहे हैं तो अवसर मिलने पर अथवा आपकी आवश्यक्ता पूर्ण होने के उपरांत स्वेच्छापूर्वक अपनी पहचान के साथ अथवा पहचान छिपाकर किसी भी माध्यम से उपरोक्त पते पर भेज दें ! हम सपरिवार सदैव आपके आभारी रहेंगे ! आज के समय मे हालात कभी भी किसी को अनैच्छिक कार्य करने के लिए विवश कर सकते हैं इस बात को समझना हमारे लिए मुश्किल नहीं है ! अतः बिना किसी संकोच अथवा डर के हमारी वस्तु लौटाकर अथवा उसकी कीमत अदाकर आप गर्व एवं संतोष की अनुभूति कर सकते हैं व आत्म-ग्लानि की भावना से बच सकते हैं साथ ही हम भी पीड़ा और संकट की अल्पकालिक स्थिति से बाहर आ सकते हैं ! हमें प्रत्येक व्यक्ति के परिश्रम का एवं हालात का सम्मान करना आना चाहिए! हो सकता है कि इस समय मे मै भी कठिन परिस्थितियों मे घिरा होऊं और आप इससे अंजान हों ! और हम एक दूसरे की विवशताओं को समझें और एक-दूसरे के काम आएं यही तो मनुष्यता है ! है न !?? आपका सहयात्री 🙏🙏 पता #सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)