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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - वो भी मस्तिष्क हीन हैं जो लिए जीते है ! सिर्फ अपने वो भी मस्तिष्क हीन हैं जो लिए जीते है ! सिर्फ अपने - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जिन लोगों ने अपने लालच और सत्ता की हवस मिटाने के लिए धरती को खात्मे की कगार परला खडा किया है अब वो चांद पर चढाई करने को तैयार हैं ये लोग ही तो हैं हिरण्याक्ष महिषासुर के वंशज ! और जिन लोगों ने अपने लालच और सत्ता की हवस मिटाने के लिए धरती को खात्मे की कगार परला खडा किया है अब वो चांद पर चढाई करने को तैयार हैं ये लोग ही तो हैं हिरण्याक्ष महिषासुर के वंशज ! और - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - यदि स्चयं के मान-्अपमान का तथा मृत्यूभय का भाव शेष है तो आप साधु-संत कैसे ? यदि शास्त्रों पर, व उनमे वर्णित सिद्धान्त पर, एवं धर्म की कर्मफल के स्थापना हेतु सर्वव्यापी परब्रह्म के ईश्वरीय अवतारों के च्याख्यानों पर आपकी पूर्ण श्रद्धा है तो सबकुछ ईश्वर पर छोड़कर सिर्फ अपना कर्म कीजिए ! यदि स्चयं के मान-्अपमान का तथा मृत्यूभय का भाव शेष है तो आप साधु-संत कैसे ? यदि शास्त्रों पर, व उनमे वर्णित सिद्धान्त पर, एवं धर्म की कर्मफल के स्थापना हेतु सर्वव्यापी परब्रह्म के ईश्वरीय अवतारों के च्याख्यानों पर आपकी पूर्ण श्रद्धा है तो सबकुछ ईश्वर पर छोड़कर सिर्फ अपना कर्म कीजिए ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जब तक अहंकार मुक्त रहता है मनुष्य तब तक जीवित रहता है ! जब तक अहंकार मुक्त रहता है मनुष्य तब तक जीवित रहता है ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जीवन भर के लिए ये जमीन और ये आसमान मेरे नाम कर दिया ! ऐ मेरे मालिक अब संतुष्टि का वरदान और देकर यह जीवन सफल कर दो ! जीवन भर के लिए ये जमीन और ये आसमान मेरे नाम कर दिया ! ऐ मेरे मालिक अब संतुष्टि का वरदान और देकर यह जीवन सफल कर दो ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - कुछ मत पूछिए जनाब ये एक अजीब दौर है, जो जितना ज्यादा पढा लिखा है, वह उतना शातिर चोर है !! कुछ मत पूछिए जनाब ये एक अजीब दौर है, जो जितना ज्यादा पढा लिखा है, वह उतना शातिर चोर है !! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) सौ साल की आजादी पर हमारा भारतवर्ष कुछ ऐसा होना चाहिए * विकसित देशों की तरह एक सख्त संविधान जो सबके लिए समान हो ! * एक समान शिक्षा व्यवस्था और एक समान अध्ययन सामग्री ! * अनावश्यक एवं अनुपयोगी अध्ययन सामग्रियां शेष न हों ! * विद्यार्थी की आर्थिक एवं मानसिक स्थिति के अनुकूल विषयों का चयन किया जाए ! अथवा कुशल बनाया जाए ! * सभी को सब धर्मों की शिक्षा अनिवार्य हो ! सिर्फ सार्वजनिक शिक्षा केंद्रों मे ही अध्ययन एवं अध्यापन की अनुमति हो ! और सभी प्रकार के नीजि धार्मिक शिक्षा केंद्रों का संचालन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हो ! * उच्चशिक्षा एवं सरकारी नौकरियों को पूर्णतः आरक्षण मुक्त ! * ठेकेदारी एवं अस्पतालों मे शोषण को बलात्कार से ज्यादा जघन्य अपराध का दर्जा हो ! * चुनाव लड़ने की योग्यता लिखित परीक्षा परिणामों के आधार पर तय हो ! * माता-पिता को संतान की कम से कम एक चौथाई चल-अचल संपत्ति के उपयोग स्वतंत्र अधिकार हो ! * सिर्फ मादक पदार्थों एवं लक्जरी चीजों पर टैक्स लागू हो ! * यात्रा वाहन व कानूनी एवं चिकित्सकीय सहायता के लिए न्यूनतम समय सीमा तय हो ! * महिलाओं के द्वारा पुरूषों के उत्पीड़न को महिलाओं के उत्पीड़न के समान दर्जा हो ! * आधुनिकीकरण की रेस अल्प शिक्षितों, निर्धनों, अनाथों एवं बुजुर्गों के अनदेखी का कारण न हो ! * इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इस्तेमाल के लिए साक्षरता एवं उपयोग के अनुकूल नियमावली हो ! * विद्यार्थियों की आवश्यक्तानुसार गैजेट्स का प्रावधान हो ! जिनमें उनका मनोरंजन युक्त शिक्षण सामग्री के अतिरिक्त कुछ भी अनावश्यक करना असंभव हो ! * गैर प्राकृतिक अथवा प्राकृतिक आपदाएं संयुक्त रूप से बीमा एवं भुगतान के योग्य हों ! * बेरोजगार भारतीयों को आवास,आहार एवं शत-प्रतिशत चिकित्सकीय सुविधाओं का अधिकार हो ! * सभी निजी एवं सरकारी संस्थाओं एवं नियुक्तियों को समान रूप से पारदर्शी एवं संबंध आधारित आरक्षणों से मुक्त हों * भ्रष्टाचार का अपराध देशद्रोह एवं बलात्कार के समान दंडनीय हो * सभी गांवों के लिए लघु उद्योग एवं उत्तम कृषि उपकरणों की उपलब्धता एवं सतर्क निगरानी सुनिश्चित हो !
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय ! मुई खाल की श्वास सों ॰ सार भसम होय जाय !! अर्थात निर्बल का बल राम है ! निर्बल व्यक्ति सबकुछ क्षमा करता जाता है सहता चला जाता है ! लेकिन जिस क्षण उसकी तड़प आंसुओं का रूप ग्रहण करती है उसी क्षण से प्रकृति न्याय की प्रकिया आरंभ कर देती है ! दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय ! मुई खाल की श्वास सों ॰ सार भसम होय जाय !! अर्थात निर्बल का बल राम है ! निर्बल व्यक्ति सबकुछ क्षमा करता जाता है सहता चला जाता है ! लेकिन जिस क्षण उसकी तड़प आंसुओं का रूप ग्रहण करती है उसी क्षण से प्रकृति न्याय की प्रकिया आरंभ कर देती है ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अमेरिका, चीन और जापान से विषयों पर भारत की तुलना सभी होनी चाहिए! इसकी शुरूआत 'संविधान एवं नागरिकों के 'स्वभाव मे अंतरसे की जानी चाहिए! 2 ? ? ? अमेरिका, चीन और जापान से विषयों पर भारत की तुलना सभी होनी चाहिए! इसकी शुरूआत 'संविधान एवं नागरिकों के 'स्वभाव मे अंतरसे की जानी चाहिए! 2 ? ? ? - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - ना मैं भूत हूं! न मैं भविष्य हूं! मैं सिर्फ वर्तमान हू! ना मैं भूत हूं! न मैं भविष्य हूं! मैं सिर्फ वर्तमान हू! - ShareChat