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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - कीजिए कि पूरी धरती किसी কল্পনা महाशक्तिशाली असुर के अधीन हो चुकी है ! बड़े बड़े महारथी उसके दास बन चुके हैं ! लोग यातनाओं की पराकाष्ठा मे दम तोड़ रहे हैं ! क्योंकि fagd महादैत्य की प्राण ऊर्जा का श्रोत जल एवं है अतः विश्व के समस्त जल एवं संसासधनों पर अब सिर्फ उसका अधिकार है भविष्य का वह बिल्कुल वह Al ही है ! अब तक महादानव Al है जिन सुख सविधाओं की लत आपको लगी थी वह ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का कारण बनी ! लेकिन अब जो लत आपको लगने वाली है और वह जो बदलाव लाएगी, हैवानियत शब्द उसे उसके लिए बयां करने के लिए कम पड़ जाएगा कोसना तो छोड़िए आपकी आने नस्लें आप पर थूकेंगी ! कीजिए कि पूरी धरती किसी কল্পনা महाशक्तिशाली असुर के अधीन हो चुकी है ! बड़े बड़े महारथी उसके दास बन चुके हैं ! लोग यातनाओं की पराकाष्ठा मे दम तोड़ रहे हैं ! क्योंकि fagd महादैत्य की प्राण ऊर्जा का श्रोत जल एवं है अतः विश्व के समस्त जल एवं संसासधनों पर अब सिर्फ उसका अधिकार है भविष्य का वह बिल्कुल वह Al ही है ! अब तक महादानव Al है जिन सुख सविधाओं की लत आपको लगी थी वह ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का कारण बनी ! लेकिन अब जो लत आपको लगने वाली है और वह जो बदलाव लाएगी, हैवानियत शब्द उसे उसके लिए बयां करने के लिए कम पड़ जाएगा कोसना तो छोड़िए आपकी आने नस्लें आप पर थूकेंगी ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - काम किसी और का और नाम किसी और का ! उद्योगपतियों को कोई फर्क नहीं पडता कि उनकी कंपनी मे मोटी तन्ख्वाह लेने वाले वास्तव मे उस योग्य हैं भी या अपने अधीनस्थों के काम का श्रेय लेकर उन्हें मूर्ख बना रहे हैं ! ३०% से अधिक ऐसे मिल ही जाएंगे जो रिश्तेदारों नेताओं प्रशासनिक अधिकारियों के लिंक से या फिर रिश्वत देकर आपकी कंपनी मे नियुक्त हुए हैं ! जो दस हजार के वेतन की योग्यता भी नहीं रखते उन्हें लाखों देकर अपनी और देश की दोनो की माली हालत खराब कर रहे हैं ! यकीन न हो तो अपनी कंपनी के सभी कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से बारी-२ से मिलकर तसल्ली कर लीजिए ! काम किसी और का और नाम किसी और का ! उद्योगपतियों को कोई फर्क नहीं पडता कि उनकी कंपनी मे मोटी तन्ख्वाह लेने वाले वास्तव मे उस योग्य हैं भी या अपने अधीनस्थों के काम का श्रेय लेकर उन्हें मूर्ख बना रहे हैं ! ३०% से अधिक ऐसे मिल ही जाएंगे जो रिश्तेदारों नेताओं प्रशासनिक अधिकारियों के लिंक से या फिर रिश्वत देकर आपकी कंपनी मे नियुक्त हुए हैं ! जो दस हजार के वेतन की योग्यता भी नहीं रखते उन्हें लाखों देकर अपनी और देश की दोनो की माली हालत खराब कर रहे हैं ! यकीन न हो तो अपनी कंपनी के सभी कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से बारी-२ से मिलकर तसल्ली कर लीजिए ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - कदम उस दिशा में हैं तुम्हारा लक्ष्य क्या है ? 5R इसकी समीक्षा कौन करेगा ? रिश्ते नाते प्रतिष्ठित होने की चाह और सुख-्शांति की आशा मे धन-संपत्ति एकत्र करने की भाग दौड़ 3নন: शोक दुःख भय और असंतोष की प्राप्ति जिसकी कल्पना कभी की भी नही थी ! जब तक ज्ञात होता है कि सुख सिर्फ निःस्वार्थ कर्म मे है,संचयन मे नहीं IT#8! मे नहीं स्वयं के भीतर देखने मे दूसरों है ! तब तक लक्ष्य जो कभी दूर था ही नहीं से बहुत दूर भटक कर भ्रम की भूल मे पूरी तरह फंस भुलैया चुके होते हो और सिर्फ तुम और तुम्हारे कर्म के अतिरिक्त कुछ भी तुम्हारा नहीं है इस एक सत्य को छोड़कर शेष सब कुछ स्वीकार कर चुके होते हो ! कदम उस दिशा में हैं तुम्हारा लक्ष्य क्या है ? 5R इसकी समीक्षा कौन करेगा ? रिश्ते नाते प्रतिष्ठित होने की चाह और सुख-्शांति की आशा मे धन-संपत्ति एकत्र करने की भाग दौड़ 3নন: शोक दुःख भय और असंतोष की प्राप्ति जिसकी कल्पना कभी की भी नही थी ! जब तक ज्ञात होता है कि सुख सिर्फ निःस्वार्थ कर्म मे है,संचयन मे नहीं IT#8! मे नहीं स्वयं के भीतर देखने मे दूसरों है ! तब तक लक्ष्य जो कभी दूर था ही नहीं से बहुत दूर भटक कर भ्रम की भूल मे पूरी तरह फंस भुलैया चुके होते हो और सिर्फ तुम और तुम्हारे कर्म के अतिरिक्त कुछ भी तुम्हारा नहीं है इस एक सत्य को छोड़कर शेष सब कुछ स्वीकार कर चुके होते हो ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - बिल्कुल नहीं का अर्थ यह होने 31[ है कि दूसरों को खुश करने और भरोसा लिए बनाए रखने के अपने आत्म सम्मान एवं समाज के नैतिक मूल्यों से लगातार समझौता करते रहिए ! बल्कि इसका अभिप्राय यह है कि सदैव सबकी भावनाओं और सभी की गरिमा का आदर करते हुए सजग रहें ! बिल्कुल नहीं का अर्थ यह होने 31[ है कि दूसरों को खुश करने और भरोसा लिए बनाए रखने के अपने आत्म सम्मान एवं समाज के नैतिक मूल्यों से लगातार समझौता करते रहिए ! बल्कि इसका अभिप्राय यह है कि सदैव सबकी भावनाओं और सभी की गरिमा का आदर करते हुए सजग रहें ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - धम एक िषय ह H Iqqq की किताबें अनेक हैं ! इसलिए कन्फ्यूजन भी बहुत हैं ! यदि सबकी व्यक्तिगत परिस्थितियां लिए  अलग हैं तो सबके धर्म की परिभाषा एक कैसे हो सकती है ? यदि आप जानना चाहते हैं कि आपका क्या धर्म है ? तो एकांत मे बैठकर आत्मचिंतन कीजिए ! उत्तर आपके समक्ष स्वयं प्रकट हो जाएगा ! आपको आश्चर्य तब होगा जब आप पुनः पुस्तक मे अपने धर्म क्योंकि उसमे वही की खोज करेंगे मिलेगा जिसे आपने आत्म चिंतन से स्वयं प्रकट किया था धम एक िषय ह H Iqqq की किताबें अनेक हैं ! इसलिए कन्फ्यूजन भी बहुत हैं ! यदि सबकी व्यक्तिगत परिस्थितियां लिए  अलग हैं तो सबके धर्म की परिभाषा एक कैसे हो सकती है ? यदि आप जानना चाहते हैं कि आपका क्या धर्म है ? तो एकांत मे बैठकर आत्मचिंतन कीजिए ! उत्तर आपके समक्ष स्वयं प्रकट हो जाएगा ! आपको आश्चर्य तब होगा जब आप पुनः पुस्तक मे अपने धर्म क्योंकि उसमे वही की खोज करेंगे मिलेगा जिसे आपने आत्म चिंतन से स्वयं प्रकट किया था - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - आप एक अच्छे कर्मचारी और एक अच्छे नागरिक हैं क्या ? आप एक अच्छे कर्मचारी और एक अच्छे नागरिक हैं क्या ? - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - और एक अच्छे आप एक अच्छे नेता अधिकारी हैं क्या ? और एक अच्छे आप एक अच्छे नेता अधिकारी हैं क्या ? - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - आप अच्छे माता पिता और अच्छे शिक्षक हैं क्या ? आप अच्छे माता पिता और अच्छे शिक्षक हैं क्या ? - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - आप अच्छे मित्र हैं... 39 अच्छे पुत्र पुत्री और अच्छे भी हैं क्या..? gs आप अच्छे मित्र हैं... 39 अच्छे पुत्र पुत्री और अच्छे भी हैं क्या..? gs - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - राजनीति को गंदा बताने वाले प्रायः तथ्यों की गहराई पर ध्यान नहीं देते राजनीति इतनी पवित्र शक्ति है जो कि संसार के सब जीवों एवं प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का सबके हितों को संरक्षण देने को निरंतर प्रयास करती है प्रयासरत रहती है दुनिया मे मनुष्य के आस पास जो ಖTuT कुछ भी सुंदरता व निर्भयता से सुसज्जित व्यवस्था दिखाई देती है वह राजनीति की पवित्र भावना को स्पष्ट करती है के बीच कुछ और यदि ८०० करोण के विशाल जन समूह अव्यवस्था है तो शायद वह और उनके प्रति दायित्वों एवं चुनौतियों संदर्भ में बहुत थोड़ी है वास्तव मे तो स्वच्छता ही जैसे गंदगी को हटा स्थाई और आकर्षक होती है गंदगी नहीं देने से कोई स्थान स्वच्छ हो जाता है वैसे ही राजनीति को भी स्थाई रूप से स्वच्छ रखा जा सकता है सबक, सतर्कता और से ! इसे एक पुण्य कर्म और पवित्र जिम्मेदारी के जागरूकता रूप मे स्वीकार करके राजनीति को गंदा बताने वाले प्रायः तथ्यों की गहराई पर ध्यान नहीं देते राजनीति इतनी पवित्र शक्ति है जो कि संसार के सब जीवों एवं प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का सबके हितों को संरक्षण देने को निरंतर प्रयास करती है प्रयासरत रहती है दुनिया मे मनुष्य के आस पास जो ಖTuT कुछ भी सुंदरता व निर्भयता से सुसज्जित व्यवस्था दिखाई देती है वह राजनीति की पवित्र भावना को स्पष्ट करती है के बीच कुछ और यदि ८०० करोण के विशाल जन समूह अव्यवस्था है तो शायद वह और उनके प्रति दायित्वों एवं चुनौतियों संदर्भ में बहुत थोड़ी है वास्तव मे तो स्वच्छता ही जैसे गंदगी को हटा स्थाई और आकर्षक होती है गंदगी नहीं देने से कोई स्थान स्वच्छ हो जाता है वैसे ही राजनीति को भी स्थाई रूप से स्वच्छ रखा जा सकता है सबक, सतर्कता और से ! इसे एक पुण्य कर्म और पवित्र जिम्मेदारी के जागरूकता रूप मे स्वीकार करके - ShareChat