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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - तेरी मेरी समझ अलग है,नजरिया अलग है,काम अलग है अंदाज भी अलग है! मगर परेशानियां एक हैं जरूरतें एक हैं, भावनाएं एक हैं मंजिलें एक हैं और मालिक भी एक ही है! फिर तू खुद को अलग क्यूँ मानता है? हमारे सिर्फ मुझ से जिस्म अलग है,जज्बात तो एक ही है! तेरी मेरी समझ अलग है,नजरिया अलग है,काम अलग है अंदाज भी अलग है! मगर परेशानियां एक हैं जरूरतें एक हैं, भावनाएं एक हैं मंजिलें एक हैं और मालिक भी एक ही है! फिर तू खुद को अलग क्यूँ मानता है? हमारे सिर्फ मुझ से जिस्म अलग है,जज्बात तो एक ही है! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - प्रकृति का दिया सबकुछ जैसा था जीवों के लिए पर्याप्त था ! सब एक जीव की जिज्ञासा बढी ! उसने स्वयं को मनुष्य नाम दिया व प्रकृति के को जानना चाहा और धर्म रहस्यों का उदय हुआ ! लेकिन जब उसका मन बढ़ा तो उसने अन्य जीवों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया ! परिणाम स्वरूप अनगिनत जीव विलुप्त हो गए ! फिर उसने मनुष्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया और अब वह स्वयं विलुप्त होने की कगार पर है! प्रकृति का दिया सबकुछ जैसा था जीवों के लिए पर्याप्त था ! सब एक जीव की जिज्ञासा बढी ! उसने स्वयं को मनुष्य नाम दिया व प्रकृति के को जानना चाहा और धर्म रहस्यों का उदय हुआ ! लेकिन जब उसका मन बढ़ा तो उसने अन्य जीवों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया ! परिणाम स्वरूप अनगिनत जीव विलुप्त हो गए ! फिर उसने मनुष्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया और अब वह स्वयं विलुप्त होने की कगार पर है! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - अच्छी और काम की चीजों को करने के पूरा जीवन कम है ! यह जानकर भी लिए बेईमानी और व्यर्थ की बातों मे क्यूँ उलझ जाते हैं लोग !? बुद्धि भ्रमित कर देती कर रह शायद यही माया की सबसे बड़ी शक्ति గ్ే ೯ अच्छी और काम की चीजों को करने के पूरा जीवन कम है ! यह जानकर भी लिए बेईमानी और व्यर्थ की बातों मे क्यूँ उलझ जाते हैं लोग !? बुद्धि भ्रमित कर देती कर रह शायद यही माया की सबसे बड़ी शक्ति గ్ే ೯ - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - सोचिए कि जब आधुनिक युग मे एक॰एक जरा इंसान को साधारण समाजिक बातें समझाना मुमकिन नहीं है ! तो फिर विज्ञान की बारीकियों को सबको कैसे समझा पाएंगे ? प्राचीन समय की बात ही क्या ? शायद इसीलिए हमारे पूर्वजों धरती के ईको सिस्टम को बचाए रखने के लिए धर्म विज्ञान की रचना की ताकि लोग और लोक दोनो सुरक्षित और दीर्घायु हों सोचिए कि जब आधुनिक युग मे एक॰एक जरा इंसान को साधारण समाजिक बातें समझाना मुमकिन नहीं है ! तो फिर विज्ञान की बारीकियों को सबको कैसे समझा पाएंगे ? प्राचीन समय की बात ही क्या ? शायद इसीलिए हमारे पूर्वजों धरती के ईको सिस्टम को बचाए रखने के लिए धर्म विज्ञान की रचना की ताकि लोग और लोक दोनो सुरक्षित और दीर्घायु हों - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - वो भी मस्तिष्क हीन हैं जो लिए जीते है ! सिर्फ अपने वो भी मस्तिष्क हीन हैं जो लिए जीते है ! सिर्फ अपने - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जिन लोगों ने अपने लालच और सत्ता की हवस मिटाने के लिए धरती को खात्मे की कगार परला खडा किया है अब वो चांद पर चढाई करने को तैयार हैं ये लोग ही तो हैं हिरण्याक्ष महिषासुर के वंशज ! और जिन लोगों ने अपने लालच और सत्ता की हवस मिटाने के लिए धरती को खात्मे की कगार परला खडा किया है अब वो चांद पर चढाई करने को तैयार हैं ये लोग ही तो हैं हिरण्याक्ष महिषासुर के वंशज ! और - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - यदि स्चयं के मान-्अपमान का तथा मृत्यूभय का भाव शेष है तो आप साधु-संत कैसे ? यदि शास्त्रों पर, व उनमे वर्णित सिद्धान्त पर, एवं धर्म की कर्मफल के स्थापना हेतु सर्वव्यापी परब्रह्म के ईश्वरीय अवतारों के च्याख्यानों पर आपकी पूर्ण श्रद्धा है तो सबकुछ ईश्वर पर छोड़कर सिर्फ अपना कर्म कीजिए ! यदि स्चयं के मान-्अपमान का तथा मृत्यूभय का भाव शेष है तो आप साधु-संत कैसे ? यदि शास्त्रों पर, व उनमे वर्णित सिद्धान्त पर, एवं धर्म की कर्मफल के स्थापना हेतु सर्वव्यापी परब्रह्म के ईश्वरीय अवतारों के च्याख्यानों पर आपकी पूर्ण श्रद्धा है तो सबकुछ ईश्वर पर छोड़कर सिर्फ अपना कर्म कीजिए ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जब तक अहंकार मुक्त रहता है मनुष्य तब तक जीवित रहता है ! जब तक अहंकार मुक्त रहता है मनुष्य तब तक जीवित रहता है ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - जीवन भर के लिए ये जमीन और ये आसमान मेरे नाम कर दिया ! ऐ मेरे मालिक अब संतुष्टि का वरदान और देकर यह जीवन सफल कर दो ! जीवन भर के लिए ये जमीन और ये आसमान मेरे नाम कर दिया ! ऐ मेरे मालिक अब संतुष्टि का वरदान और देकर यह जीवन सफल कर दो ! - ShareChat
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - कुछ मत पूछिए जनाब ये एक अजीब दौर है, जो जितना ज्यादा पढा लिखा है, वह उतना शातिर चोर है !! कुछ मत पूछिए जनाब ये एक अजीब दौर है, जो जितना ज्यादा पढा लिखा है, वह उतना शातिर चोर है !! - ShareChat