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आज का मंत्र #आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मंत्र यदा किञ्चिज्ज्ञोड्हं द्विप इव मदान्धः মমননী तदा सर्वज्ञोडस्मीत्यभवदवलिप्तं मम मनः Il भावार्थः जब मैं थोड़ा ्थोड़ा जानता था, तो मदमस्त हाथी की तरह घमंडी हो गया था और सोचता था कि मैं सब कुछ जानता हूँ। यह अभिमान का भाव था जो समय के साथ उतरगय। भर्तहर आज का मंत्र यदा किञ्चिज्ज्ञोड्हं द्विप इव मदान्धः মমননী तदा सर्वज्ञोडस्मीत्यभवदवलिप्तं मम मनः Il भावार्थः जब मैं थोड़ा ्थोड़ा जानता था, तो मदमस्त हाथी की तरह घमंडी हो गया था और सोचता था कि मैं सब कुछ जानता हूँ। यह अभिमान का भाव था जो समय के साथ उतरगय। भर्तहर - ShareChat