हिंदू परंपरा में देवी षष्ठी को बच्चों की रक्षक देवी माना जाता है और बिल्ली को उनका वाहन कहा जाता है। देवी षष्ठी की पूजा विशेष रूप से नवजात बच्चों की रक्षा और उनके सुख-समृद्ध जीवन के लिए की जाती है।
पुराणों के अनुसार देवी षष्ठी प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न देवी हैं, इसलिए उनका नाम “षष्ठी” पड़ा।
कुछ ग्रंथों में उन्हें
**कार्तिकेय की पत्नी देवसेना का रूप भी माना गया है।
राजा प्रियव्रत की कथा
पुराणों में एक प्रसिद्ध कथा राजा प्रियव्रत से जुड़ी है।
राजा प्रियव्रत धर्मात्मा और प्रतापी राजा थे, लेकिन उन्हें संतान नहीं थी। बहुत समय बाद उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कराया। यज्ञ के प्रभाव से उनकी पत्नी को पुत्र हुआ, लेकिन दुर्भाग्य से बच्चा जन्म लेते ही मृत हो गया।
राजा अपने मृत पुत्र को गोद में लेकर श्मशान पहुँचे और अत्यंत दुखी होकर विलाप करने लगे। तभी आकाश से एक दिव्य रथ उतरा और उसमें से देवी षष्ठी प्रकट हुईं।
देवी ने कहा:
“मैं बच्चों की रक्षक देवी हूँ। जो मेरी पूजा करता है उसे संतान सुख और बालकों की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है।”
राजा ने देवी की स्तुति की और उनसे कृपा माँगी। देवी प्रसन्न हुईं और उस मृत बालक को पुनः जीवित कर दिया।
इसके बाद देवी ने कहा कि हर महीने की षष्ठी तिथि पर और बच्चे के जन्म के छठे दिन उनकी पूजा करनी चाहिए। तभी से छठी की पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई।
इसी मान्यता के कारण हिंदू परंपरा में यह विश्वास है कि
बच्चे के जन्म के छठे दिन (छठी) देवी षष्ठी आती हैं
वे बच्चे के भाग्य का लेखन करती हैं
उस दिन माता विशेष व्रत और पूजा करती है
कई स्थानों पर बिल्ली को भी देवी का वाहन मानकर सम्मान दिया जाता है
देवी षष्ठी बच्चों की रक्षा और उनके कल्याण की देवी मानी जाती हैं। उनकी पूजा से संतान की रक्षा, स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
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