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#*આપણે વિચારીશું ખરા?* #islam guide us in every field of life #Qur'an and We #*let us understand our religion #सोचने वाली बात
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - 4/6/26 (1) ক্তুংঙসান 49/12 "ऐ ईमान वालों ! बहुत ज़्यादा गुमान (शक-संदेह) करने से बचो, क्योंकि यक़ीनन कुछ गुमान गुनाह (पाप) होते हैं। और एक॰दूसरे की जासूसी (टोह) न करो, और न ही से कोई किसी की पीठ पीछे तुममें बुराई (ग़ीबत/निंदा) करे।"Qur'an 49/12) (२) सहीह मुस्लिम २५६३ a (हदीस) "गुमान (शक) से बचो, क्योंकि गुमान बात का सबसे बड़ा झूठ है। और एक॰दूसरे के (दोष के) पीछे न पड़ो, और न 87 ही एक-दूसरे की जासूसी करो। और एक-दूसरे से जलन (ईर्ष्यात न रखो, और न ही एक॰दूसरे से द्वेष (कपट) और दुश्मनी रखो। और अल्लाह के बंदे और आपस में भाई-भाई बन कर रहो।" 4/6/26 (1) ক্তুংঙসান 49/12 "ऐ ईमान वालों ! बहुत ज़्यादा गुमान (शक-संदेह) करने से बचो, क्योंकि यक़ीनन कुछ गुमान गुनाह (पाप) होते हैं। और एक॰दूसरे की जासूसी (टोह) न करो, और न ही से कोई किसी की पीठ पीछे तुममें बुराई (ग़ीबत/निंदा) करे।"Qur'an 49/12) (२) सहीह मुस्लिम २५६३ a (हदीस) "गुमान (शक) से बचो, क्योंकि गुमान बात का सबसे बड़ा झूठ है। और एक॰दूसरे के (दोष के) पीछे न पड़ो, और न 87 ही एक-दूसरे की जासूसी करो। और एक-दूसरे से जलन (ईर्ष्यात न रखो, और न ही एक॰दूसरे से द्वेष (कपट) और दुश्मनी रखो। और अल्लाह के बंदे और आपस में भाई-भाई बन कर रहो।" - ShareChat