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#जय श्री राम 🍁*"..रामु न सकहिं नाम गुन गाई.."*🍁 🛐उस नाम से क्या-क्या आनन्द होता है, उसका कोई पारावार नहीं। नाम महाराज की अपार महिमा है, असीम महिमा है। गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज सीतारामजी को इष्ट मानते हैं और वे उनके अनन्य भक्त हैं; परन्तु नाम की महिमा गाते हुए वे कहते हैं- 🛐 *'कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई।* *रामु न सकहिं नाम गुन गाई ॥'* ‼️नाम की महिमा मैं कहाँ तक कहूँ, भगवान् राम भी नाम की महिमा कह सकते नहीं। अपने इष्ट को भी असमर्थ बता देते हैं अर्थात् इस नाम की महिमा के विषय में हमारे श्रीरघुनाथजी भी असमर्थ हैं। भाई, नाम की महिमा यहाँ तक है, यहाँ तक है, ऐसा कहने में भगवान् भी असमर्थ हैं। अपने इष्ट को भी असमर्थ बता देना क्या तिरस्कार नहीं है? नहीं, नहीं, आदर है। कैसे ? इस नाम की सीमा है ही नहीं कि भाई, इसकी इतनी-इतनी महिमा है। नाम की तो अपार असीम महिमा है। वह नाम हर समय लिया जा सकता है। काम-धन्धा करते हुए, उठते- बैठते, सोते-जागते, खाते-पीते आदि हर समय में भगवान्‌ का नाम लिया जा सकता है। चैतन्य महाप्रभु कहते हैं- भगवान् ने नाम में अपनी पूरी- की-पूरी शक्ति (महिमा) रख दी है और इसमें विलक्षणता यह है कि इसके लेने में कोई समय नहीं बाँधा गया है कि अमुक समय में नाम ले सकते हो, उसके सिवाय नहीं, प्रत्युत भगवान् ने तो नाम लेने में सब समय छूट दे रखी है। नाम को तो सुबह, शाम, दोपहर, रात्रि-हर समय ले सकते हैं।‼️ 🙏*राम ! राम !! राम !!!*🙏
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