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बस नजर ढूँढते रहे और,
ये दिल यूँ ही बदनाम रहे!
धड़कनों के गलियों में,
सिलसिला सरेआम रहे!
साँसों में मन मे बातों में,
बस एक से ही ख्याल रहे!
बरबस बोले ये दिल अक्सर,
किसी पे बहुत ही बेहाल रहे!
बहुत ढूँढा पर कुछ न हुआ,
गुमनाम से ही पहचान रहे!
दो कदम देख जो बढ़ गए,
दिल पे उनके ही निशान रहे!
यूँ तो सब मीले दरबदर पर,
ओठों पर एक ही सवाल रहे!
बिछड़े गुलाब की कसक ऐसी...
अक्सर दिल को ऐसे इंतजार रहे!
कुछ तो जादू है उसके फितरत में,
बन्द आँखें हों तो उसका ही प्यार रहे!💕💞
..........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #😘लव डोज💓 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


