ShareChat
click to see wallet page
search
सबद संत कबीर #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "सबद" लोका मति के भोरा रे। जौ कासी तन तजै कबीरा, तौ रामहि कहाँ निहोरा रे।। तब हम वैसे अब हम ऐसे , इहै जनम का लाहा। ज्यूं जल में जल पैसि न निकसै, यूँ ढूरि मिल्या जुलाहाII राम भगति परि जाकौ हित चित , ताकौ अचरज काहा| गुर प्रसाद साध की संगति, जग जीतें जाइ जुलाहा II कहै कबीर सुनहुं रे संतौ , भ्रंमि परे जिनी कोई। जस कासी तस मगहर ऊसर, हिरदै राम सति होई।I (संत कबीर) Want Motivational Videos App "सबद" लोका मति के भोरा रे। जौ कासी तन तजै कबीरा, तौ रामहि कहाँ निहोरा रे।। तब हम वैसे अब हम ऐसे , इहै जनम का लाहा। ज्यूं जल में जल पैसि न निकसै, यूँ ढूरि मिल्या जुलाहाII राम भगति परि जाकौ हित चित , ताकौ अचरज काहा| गुर प्रसाद साध की संगति, जग जीतें जाइ जुलाहा II कहै कबीर सुनहुं रे संतौ , भ्रंमि परे जिनी कोई। जस कासी तस मगहर ऊसर, हिरदै राम सति होई।I (संत कबीर) Want Motivational Videos App - ShareChat