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☝ मेरे विचार - m 5i01601 0 G13 ೧ @4 सबरीमाला ० मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत महिला को महीने के 3 दिन अछठूत ক্রাৎ मानें, चौथे दिन नही?ः सुप्रीम कोर्ट लाइव नई दिल्ली| केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का सुप्रीम आदेश जारी रहे या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीशों की यह आस्था का मामला है, शुरू की। २०१८ में 5 जजों की बेंच पीठ ने मंगलवार को  सुनवाई " ने ४१ के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक न्यायिक समीक्षा - 46{ याचिकाओं के आधार पर पुनर्विचार हटा दी थी। इसके बाद दायर ७ संवैधानिक प्रश्न तय किए गए हैं जिन पर बहस की जानी है।  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहताः ये 7 प्रश्न हैं॰ 1 अनुच्छेद २५ के तहत धार्मिक स्वतंत्रता महिलाओं की मंदिर में एंट्री पर २०१८  और का फैसला गलत तरीके से लिया २५ ( व्यक्तिगत अधिकार ) का दायरा क्या है? २. अनुच्छेद अनुच्छेद २६ ( संप्रदाय के अधिकार ) में क्या संबंध है ? ३ क्या गया। उन्हें मंदिर में न जाने देना उनका अनुच्छेद २६ के अधिकार अन्य मौलिक अधिकारों के अधीन अपमान करना नहीं है। भारत में हैं ? ४. नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता का अर्थ क्या है? उन्हें पूजा जाता है। हमें इस बात पर * 5. धार्मिक प्रथाओं की न्यायिक समीक्षा की सीमा क्या है? 6 ऐतराज है कि मंदिर की इस परंपरा को अनुच्छेद २५(२ )(b ) में ' हिंदुओं के वर्ग का क्या अर्थ है? ७ अस्पृश्यता    ( छुआछूत या अनुच्छेद  कोई बाहरी व्यक्त ( जो उस धर्म का नहीं है ) जनहित याचिका १७ ) कहा गया। छुआछूत जाति के [ के जरिए किसी धार्मिक प्रथा को चुनौती दे सकता है? पढ़िए आधार पर होती थी, यह मामला उससे पहले दिन की सुनवाई में केंद्र ने क्या कहा और पीठ ने क्या  अलग है। शेष | पेज 6 टिप्पणियां कीं... m 5i01601 0 G13 ೧ @4 सबरीमाला ० मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत महिला को महीने के 3 दिन अछठूत ক্রাৎ मानें, चौथे दिन नही?ः सुप्रीम कोर्ट लाइव नई दिल्ली| केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का सुप्रीम आदेश जारी रहे या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीशों की यह आस्था का मामला है, शुरू की। २०१८ में 5 जजों की बेंच पीठ ने मंगलवार को  सुनवाई " ने ४१ के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक न्यायिक समीक्षा - 46{ याचिकाओं के आधार पर पुनर्विचार हटा दी थी। इसके बाद दायर ७ संवैधानिक प्रश्न तय किए गए हैं जिन पर बहस की जानी है।  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहताः ये 7 प्रश्न हैं॰ 1 अनुच्छेद २५ के तहत धार्मिक स्वतंत्रता महिलाओं की मंदिर में एंट्री पर २०१८  और का फैसला गलत तरीके से लिया २५ ( व्यक्तिगत अधिकार ) का दायरा क्या है? २. अनुच्छेद अनुच्छेद २६ ( संप्रदाय के अधिकार ) में क्या संबंध है ? ३ क्या गया। उन्हें मंदिर में न जाने देना उनका अनुच्छेद २६ के अधिकार अन्य मौलिक अधिकारों के अधीन अपमान करना नहीं है। भारत में हैं ? ४. नैतिकता और संवैधानिक नैतिकता का अर्थ क्या है? उन्हें पूजा जाता है। हमें इस बात पर * 5. धार्मिक प्रथाओं की न्यायिक समीक्षा की सीमा क्या है? 6 ऐतराज है कि मंदिर की इस परंपरा को अनुच्छेद २५(२ )(b ) में ' हिंदुओं के वर्ग का क्या अर्थ है? ७ अस्पृश्यता    ( छुआछूत या अनुच्छेद  कोई बाहरी व्यक्त ( जो उस धर्म का नहीं है ) जनहित याचिका १७ ) कहा गया। छुआछूत जाति के [ के जरिए किसी धार्मिक प्रथा को चुनौती दे सकता है? पढ़िए आधार पर होती थी, यह मामला उससे पहले दिन की सुनवाई में केंद्र ने क्या कहा और पीठ ने क्या  अलग है। शेष | पेज 6 टिप्पणियां कीं... - ShareChat