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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - मैं टूटकर  बोली बाबा अब खुद से लडने की ताकत भी खत्म होे गई महाकाल हँसे और बोले ४४ பள जिसे तू अपना समझ रही है ना अंत वहीं से तेरी किस्मत का नया अध्याय शुरू होगा। ने तुझे गिराया है दुनिया मैं तुझे ऐसा उठाऊँगा 3|q कि लोग तेरी हार नहीं तेरे लौटने का तूफ़ान याद रखेंगे. ऊ मैं टूटकर  बोली बाबा अब खुद से लडने की ताकत भी खत्म होे गई महाकाल हँसे और बोले ४४ பள जिसे तू अपना समझ रही है ना अंत वहीं से तेरी किस्मत का नया अध्याय शुरू होगा। ने तुझे गिराया है दुनिया मैं तुझे ऐसा उठाऊँगा 3|q कि लोग तेरी हार नहीं तेरे लौटने का तूफ़ान याद रखेंगे. ऊ - ShareChat