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Bhagat Singh - Author on ShareChat
Bhagat Singh
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फैंफैन्छस् जिद्दी का हूं [ডিcী तोकभीसीखा కౌడే]డడనేః #EK_SIR]_ फैंफैन्छस् जिद्दी का हूं [ডিcী तोकभीसीखा కౌడే]డడనేః #EK_SIR]_
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    साथियो, स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा 9 মুন্সম होनी चाहिए मैं इसे छिपाना नहीं चाहता लेकिन मैं एक शर्त पर ज़िन्दा रह सकता हूँ कि मैं कैद होकर या पाबन्द होकर जीना नहीं चाहता मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रान्ति का प्रतीक बन चुका है और क्रान्तिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊँचा उठा दिया है-इतना ऊँचा कि जीवित रहने की स्थिति में इससे ऊँचा मैं हर्गिज नहीं हो सकता IA.ఓష( साथियो, स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा 9 মুন্সম होनी चाहिए मैं इसे छिपाना नहीं चाहता लेकिन मैं एक शर्त पर ज़िन्दा रह सकता हूँ कि मैं कैद होकर या पाबन्द होकर जीना नहीं चाहता मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रान्ति का प्रतीक बन चुका है और क्रान्तिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊँचा उठा दिया है-इतना ऊँचा कि जीवित रहने की स्थिति में इससे ऊँचा मैं हर्गिज नहीं हो सकता IA.ఓష(
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    आज मेरी कमजोरियाँ जनता के सामने नहीं हैं | अगर मैं फाँसी से बच गया तो वे जाहिर हो जाएँगी और क्रान्ति का प्रतीक चिह्न मद्धिम पड़ जाएगा हीजाए। लेकिन दिलेराना ढंग से या सम्भवतः मिट हँसते - हँसते मेरे फाँसी चढ़ने की सूरत में हिन्दुस्तानी माताएँ अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देनेवालों की तादाद इतनी बढ कि क्रान्ति को जाएगी रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी | I५ 1#( आज मेरी कमजोरियाँ जनता के सामने नहीं हैं | अगर मैं फाँसी से बच गया तो वे जाहिर हो जाएँगी और क्रान्ति का प्रतीक चिह्न मद्धिम पड़ जाएगा हीजाए। लेकिन दिलेराना ढंग से या सम्भवतः मिट हँसते - हँसते मेरे फाँसी चढ़ने की सूरत में हिन्दुस्तानी माताएँ अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देनेवालों की तादाद इतनी बढ कि क्रान्ति को जाएगी रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी | I५ 1#(
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    हाँ, एक विचार आज भी मेरे मन में आता है कि देश और मानवता के लिए जो कुछ करने की हसरतें मेरे दिल में थीं॰ उनका भाग भी हजारवाँ पूरा नहीं कर सका अगर स्वतन्त्र, ज़िन्दा रह सकता तब शायद इन्हें पूरा करने का अवसर मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता | 12!999 I५ 1#( हाँ, एक विचार आज भी मेरे मन में आता है कि देश और मानवता के लिए जो कुछ करने की हसरतें मेरे दिल में थीं॰ उनका भाग भी हजारवाँ पूरा नहीं कर सका अगर स्वतन्त्र, ज़िन्दा रह सकता तब शायद इन्हें पूरा करने का अवसर मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता | 12!999 I५ 1#(
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    सिवाय मेरे मन में कभी कोई लालच इसके फाँसी से बचे रहने का नहीं आया मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कौन होगा ? आजकल मुझे स्वयं पर बहुत गर्व है। अब तो बड़ी बेताबी से अन्तिम परीक्षा का इन्तजार है। कामना है कि यह और नजदीक हो जाए। आपका साथी, भगत सिंह | 0 ص م لسد ( 22 মাব, 1931 12!999 सिवाय मेरे मन में कभी कोई लालच इसके फाँसी से बचे रहने का नहीं आया मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कौन होगा ? आजकल मुझे स्वयं पर बहुत गर्व है। अब तो बड़ी बेताबी से अन्तिम परीक्षा का इन्तजार है। कामना है कि यह और नजदीक हो जाए। आपका साथी, भगत सिंह | 0 ص م لسد ( 22 মাব, 1931 12!999
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