विरह में भी जो कम न हुआ,
ऐसा अलौकिक ये अनुराग है,
राधा के दिल में कान्हा है,
और कान्हा के सुर में वैराग है।
न मिलाप की कोई शर्त यहाँ,
न खोने का कोई डर भारी,
इतिहास गवाह है सदियों से,
इस प्रेम पे गदगद दुनिया सारी।
कान्हा को पाना प्रेम नहीं,
खुद खो जाना ही भक्ति है,
राधा नाम की शक्ति में ही,
तो गिरधारी की भी मुक्ति है
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