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विरह में भी जो कम न हुआ, ऐसा अलौकिक ये अनुराग है, राधा के दिल में कान्हा है, और कान्हा के सुर में वैराग है। न मिलाप की कोई शर्त यहाँ, न खोने का कोई डर भारी, इतिहास गवाह है सदियों से, इस प्रेम पे गदगद दुनिया सारी। कान्हा को पाना प्रेम नहीं, खुद खो जाना ही भक्ति है, राधा नाम की शक्ति में ही, तो गिरधारी की भी मुक्ति है #❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #🌙 गुड नाईट #जय श्रीकृष्ण #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #💓 मोहब्बत दिल से
❣️Love you ज़िंदगी ❣️ - कभी मन भटकता है, कभी बेचैन हो जाता है... और कभी दुनिया की आवाज़ों में खुद को खो देता 8 அிதனர் कहते हैं = पर "जबनजब यह चंचल और अस्थिर मन भटक जाए तब-्तब उसे प्रेमपूर्वक मेरी ओर लौटा लाओ। " भगवद्गीता 6.२६ शायद शांति कहीं बाहर नहीं , बस कृष्ण के नाम में छुपी है। कभी मन भटकता है, कभी बेचैन हो जाता है... और कभी दुनिया की आवाज़ों में खुद को खो देता 8 அிதனர் कहते हैं = पर "जबनजब यह चंचल और अस्थिर मन भटक जाए तब-्तब उसे प्रेमपूर्वक मेरी ओर लौटा लाओ। " भगवद्गीता 6.२६ शायद शांति कहीं बाहर नहीं , बस कृष्ण के नाम में छुपी है। - ShareChat