ShareChat
click to see wallet page
search
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - सुनील जैन ज्ञान, कर्म और उपासना को समझकर छद्म से बचें आज के लग्जरी मार्केट में ब्रांडेड वस्तुओं में भी लगभग ८% माल नकली बताया जाता है तो सामान्य वस्तुओं की तो बात छोड़ ही दें।  खान-्पान की वस्तुएं नकली किसी के नाम से कोई और परीक्षा दे दे, नौकरी किसी के नाम और कर कोई और रहा है और अब तो एआई के कारण नकली ्असली का पता लगाना भी मुश्किल है। शास्त्रों में भी कई प्रसंग ऐसे आते हैं। रावण नकली साधु बनकर  সীনা জী ক্ষা অপন্কতো ক্ং যমা] विष्णु जी ने भी कुछ प्रसंगों मेंँ असली नकली का खेल खेला। देवताओँ के गुरु ब्रह्माजी तो नकली शुक्राचार्य बन गए, जो दैत्यों के गुरु थे। शूर्पनखा के प्रसंग से भी हम जीवन समझ सकते हैँ कि में जब असली ्नकली का मुकाबला आए तो ज्ञान,  कर्म और उपासना के मार्ग को समझकर इससे निपटा जाए। शूर्पनखा जो थी॰ वैसी न बनकर नकली होकर आई। सामने थे राम लखन सीता। शूर्पनखा की नाक कट गई। राम ज्ञान हैं लखन कर्म हैं और सीता उपासना हैं। अगर ये तीनों मार्ग सही हैं तो नकली से हम ठगाएंगे नहीं और असली का सदुपयोग कर जाएंगे।  Facebook:Pt Vijayshankar Mehta . सुनील जैन ज्ञान, कर्म और उपासना को समझकर छद्म से बचें आज के लग्जरी मार्केट में ब्रांडेड वस्तुओं में भी लगभग ८% माल नकली बताया जाता है तो सामान्य वस्तुओं की तो बात छोड़ ही दें।  खान-्पान की वस्तुएं नकली किसी के नाम से कोई और परीक्षा दे दे, नौकरी किसी के नाम और कर कोई और रहा है और अब तो एआई के कारण नकली ्असली का पता लगाना भी मुश्किल है। शास्त्रों में भी कई प्रसंग ऐसे आते हैं। रावण नकली साधु बनकर  সীনা জী ক্ষা অপন্কতো ক্ং যমা] विष्णु जी ने भी कुछ प्रसंगों मेंँ असली नकली का खेल खेला। देवताओँ के गुरु ब्रह्माजी तो नकली शुक्राचार्य बन गए, जो दैत्यों के गुरु थे। शूर्पनखा के प्रसंग से भी हम जीवन समझ सकते हैँ कि में जब असली ्नकली का मुकाबला आए तो ज्ञान,  कर्म और उपासना के मार्ग को समझकर इससे निपटा जाए। शूर्पनखा जो थी॰ वैसी न बनकर नकली होकर आई। सामने थे राम लखन सीता। शूर्पनखा की नाक कट गई। राम ज्ञान हैं लखन कर्म हैं और सीता उपासना हैं। अगर ये तीनों मार्ग सही हैं तो नकली से हम ठगाएंगे नहीं और असली का सदुपयोग कर जाएंगे।  Facebook:Pt Vijayshankar Mehta . - ShareChat