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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - मंनै म्रुहि चोटा ना खाइ।। र्नै जम कैसाथिनजाइ।। मीठा हे भाई! आम तौर पर मनुष्य जीवन भर ' चोट' खाता रहता है - कभी मोह की, कभी लोभ की॰ और कभी अहंकार की। लेकिन जब से उसने सत्य को जान लिया है और उसे आत्मज्ञान हो गया m है, तो संसार की कोई भी घटना उसे मानसिक या आत्मिक चोट नहीं पहुँचा सकती। अध्यात्मिक मार्ग में '्जम' या '्यम' को मृत्यु और दंड का प्रतीक माना गया है। आम आदमी मौत से डरता है तेरा क्योंकि उसे लगता है कि उसे हिसाब किताब देने के लिए यमराज के पास जाना होगा... जब से उसका नाता सीधा उस परमात्मा से जुड़ गया है जो यमराज का भी मालिक है। जब भक्त प्रभु के नाम में रंग जाता है॰तो वह '्जम' (काल) की सीमा भाणा से बाहर निकल जाता है। उसे अब किसी अंधेरे रास्ते पर या यम के दूतों के साथ जाने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि उसकी आत्मा मुक्त हो चुकी है। जिसे परमात्मा मिल गया, उसे मौत का क्या डर?्वह उस स्थिति में पहुँच गए हैं जहाँ सिर्फ शांति है, कोई संघर्ष या ' चोट' नहीं। मंनै म्रुहि चोटा ना खाइ।। र्नै जम कैसाथिनजाइ।। मीठा हे भाई! आम तौर पर मनुष्य जीवन भर ' चोट' खाता रहता है - कभी मोह की, कभी लोभ की॰ और कभी अहंकार की। लेकिन जब से उसने सत्य को जान लिया है और उसे आत्मज्ञान हो गया m है, तो संसार की कोई भी घटना उसे मानसिक या आत्मिक चोट नहीं पहुँचा सकती। अध्यात्मिक मार्ग में '्जम' या '्यम' को मृत्यु और दंड का प्रतीक माना गया है। आम आदमी मौत से डरता है तेरा क्योंकि उसे लगता है कि उसे हिसाब किताब देने के लिए यमराज के पास जाना होगा... जब से उसका नाता सीधा उस परमात्मा से जुड़ गया है जो यमराज का भी मालिक है। जब भक्त प्रभु के नाम में रंग जाता है॰तो वह '्जम' (काल) की सीमा भाणा से बाहर निकल जाता है। उसे अब किसी अंधेरे रास्ते पर या यम के दूतों के साथ जाने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि उसकी आत्मा मुक्त हो चुकी है। जिसे परमात्मा मिल गया, उसे मौत का क्या डर?्वह उस स्थिति में पहुँच गए हैं जहाँ सिर्फ शांति है, कोई संघर्ष या ' चोट' नहीं। - ShareChat