ShareChat
click to see wallet page
search
*આપણે નાની નાની વાતોમાં વિવાદોની અંદર કલાકો બગાડીએ છીએ અને ઘણી વખત તો સંબંધો પણ ખરાબ થઈ જાય છે. અને કહીએ છીએ કે"હું તો સાચો છું છતાંય શા માટે નમતું આપું"તેમના બધા માટે આ હદીસ માર્ગદર્શન કરે છે.*10/6/26 #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #Islam and We #points to ponder #सोचने वाली बात
*let us understand our religion - The Reward of Leaving an Argument Even When Youl Are Right" 10/6/26 *हज़रत अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमायाः* लिए "मैं उस व्यक्ति के *जन्नत में एक के किनारे (अहाते) घर* का ज़ामिन (गारंटर) हूँ जो लडाई झगड़ा छोड़ दे, चाहे वह हक (सच्चाई) पर ही क्यों न हो*। और जन्नत के लिए बीच में उस शख्स के K ಖಶಕ ज़ामिन हूँ जो मज़ाक में बोलना छोड़ दे। और जन्नत के fg ऊंचे दर्जे में उस शख्स के घर का ज़ामिन हूँ जिसके अख्लाक (व्यवहार) अच्छे रहों।"(सुनन *अबूदाऊद*4800) * 10:12 am The Reward of Leaving an Argument Even When Youl Are Right" 10/6/26 *हज़रत अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमायाः* लिए "मैं उस व्यक्ति के *जन्नत में एक के किनारे (अहाते) घर* का ज़ामिन (गारंटर) हूँ जो लडाई झगड़ा छोड़ दे, चाहे वह हक (सच्चाई) पर ही क्यों न हो*। और जन्नत के लिए बीच में उस शख्स के K ಖಶಕ ज़ामिन हूँ जो मज़ाक में बोलना छोड़ दे। और जन्नत के fg ऊंचे दर्जे में उस शख्स के घर का ज़ामिन हूँ जिसके अख्लाक (व्यवहार) अच्छे रहों।"(सुनन *अबूदाऊद*4800) * 10:12 am - ShareChat