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#yade #bachpan ki yaadein #bachpan
yade - बहुत याद आती है मकानों की पुराने वो बचपन की राते छतों पर गुज़री पहले झाडू से छत को साफ़ करने की मुहिम, फिर पानी की बाल्टी से छिडकाव और अंत में ওম পানী ক पर उठने वाली भीनी-भीनी सूखने खुशबू॰ दरियाँ बिछा कर लाइन से बिस्तर बिछाने की कवायद, पानी की सुराही के मुंह को लोटे से ढंक कर रखने के जतन लेट कर दिखाई देने वाले वो चमकीले तारे, पेड, कभी आधी रात रात भर बजता वो नीम का ' को मौसम ख़राब होने पर वो अपने अपने बिस्तर  37K समेट कर नीचे भागने की जल्दी... जिन्दगी की दास्तानें K 25K बहुत याद आती है मकानों की पुराने वो बचपन की राते छतों पर गुज़री पहले झाडू से छत को साफ़ करने की मुहिम, फिर पानी की बाल्टी से छिडकाव और अंत में ওম পানী ক पर उठने वाली भीनी-भीनी सूखने खुशबू॰ दरियाँ बिछा कर लाइन से बिस्तर बिछाने की कवायद, पानी की सुराही के मुंह को लोटे से ढंक कर रखने के जतन लेट कर दिखाई देने वाले वो चमकीले तारे, पेड, कभी आधी रात रात भर बजता वो नीम का ' को मौसम ख़राब होने पर वो अपने अपने बिस्तर  37K समेट कर नीचे भागने की जल्दी... जिन्दगी की दास्तानें K 25K - ShareChat