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#जय शनिदेव #ॐ नमः शिवाय #शुभ शनिवार `छायायां मार्तण्डस्य जज्ञे मन्दगतिः शनिः ।` `तपस्तेपे स धर्मात्मा कैलासे शंकराश्रये ॥` `तेन तुष्टो महादेवो वरं प्रादात् सुदुर्लभम् ।` `ग्रहाणामधिपत्यं च लोकपूज्यत्वमेव च॥` [ ब्रह्माण्डपुराण , उपोद्घातपाद , अध्याय २४ , श्लोक १४०-१४१ ( गीता प्रेस , गोरखपुर , पुनर्मुद्रण संवत २०८१ , पृष्ठ ११२ ) ] अर्थात 👉🏻 सूर्य की छाया से मंदगति शनि उत्पन्न हुए । धर्मात्मा शनि ने कैलास पर शंकर के आश्रय में तप किया । महादेव ने प्रसन्न होकर दुर्लभ वर दिया – `ग्रहों का आधिपत्य और लोक-पूज्यता`। चित्र में – महादेव का हाथ शनि के कंधे पर है , यही `ब्रह्माण्डपुराण २४/१४१` का `वरदान` है । `शंकराश्रये` तप किया , तो `शंकर` ने `ग्रहों का आधिपत्य` दे दिया । शनि ग्रह पर आसन – `लोकपूज्यत्वमेव च` का प्रमाण । जो `कैलास` पर तपे , वो `शनि-लोक` का राजा बने । काक वाहन साथ में – `मंदगतिः शनिः` का प्रतीक । धीरे चलता है किन्तु `न्याय` पूर्णरूपेण करता है । नीचे लिखा मंत्र – `ॐ नमः शिवाय ॐ शं शनैश्चराय नमः` – `हरिहरात्मक` स्वरूप । शिव के बिना शनि नहीं , शनि के बिना कर्म-फल नहीं । श्लोक का सार – `छाया` से जन्मे, `कैलास` पर तपे , `महादेव` से वर पाया । इसलिए `शनिवार` को `शिव-पूजा` औऱ `शनि-पूजा` अर्थात `डबल कृपा`। आप समस्त का आज का दिवस शुभ हो एवं देवाधिदेव महादेव शिव जी तथा न्यायदाता शनिदेव की कृपा से औतप्रौत हो🙏🏻💐 🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
जय शनिदेव - ऊँ नमः शिवाय ऊँ शं शनैघ्चराय नमः ऊँ नमः शिवाय ऊँ शं शनैघ्चराय नमः - ShareChat