vk
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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
तमाम साजिशों, षडयंत्रों और यातनाओं के बाद भी यदि सनातन की जड़ें शेष हैं तो इसका संपूर्ण श्रेय ब्राह्मणों को है ! याद रखिए कि जब तकनीकी नही थी तब इन्होने ही अपने परिश्रम से समाज के सभी वर्गों मे शास्त्रों की शिक्षा से संयुक्त परिवारों और रिश्तों को मर्यादाओं मे रहने की व्यवस्था स्थापित की ! योग्यतानुसार चयन का प्रावधान कर सब जीवों और प्रकृति के बीच की वैज्ञानिक जटिलताओं को एक विशिष्ट किन्तु अत्यंत साधारण जीवनशैली की संतुलित और व्यवस्थित रूप रेखा मे योजनाबद्ध तरीकों से एकीकृत किया व संसार के सब जीवों के अधिकार और अस्तित्व की रक्षा को सुनिश्चित किया ! विश्व इतिहास गवाह है कि दुनिया के दूर देशों से लोग भारत मे शिक्षा ग्रहण करने आते थे ! यदि ब्राह्मण संकीर्ण विचारधारा रखते तो ज्ञान का प्रकाश सर्वत्र नहीं फैलता ! बल्कि यह अविकसित मानव सभ्यताओं की क्रूरता मे बुझ चुका होता ! भारतवर्ष मे अब तक जो परिवार परंपरा शिष्टाचार आदि शेष है उसके लिए ब्राह्मणो के प्रति जितना भी आभार प्रकट किया जाए कम है !
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