ShareChat
click to see wallet page
search
#नीला आसमान 🌌 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गुरु महिमा😇 #😇 चाणक्य नीति
नीला आसमान 🌌 - भगवद गीता में वर्णित तप (Tap) (अध्याय १७, श्लोक १४ १९) शरीर , वाणी और मन को शुद्घ करके , ईश्वर की लिए সাদি ক किया गया अथ्यास ही तप है। तप के 3 प्रकार १. सात्विक तप २. राजसिक तप 3. নাসমিক নত (Sattvik Tap) (Rajasik Tap) (Tamasik Tap) সভ্ান, মুরনা যা ৪০ ম कर्तव्य समझकर किया जाए मान सम्मान याफल की इच्छा से किया जाए किया जाए विना फल की इच्छा के दिखावे के लिए किया जाए शरीर या मन को कष्ट श्रद्घा और श्रद्धा के साथ देकर किया जाए शरीर , वाणी और मन अहंकार और प्रदर्शन को हानि पहुँचाने के लिए किया जाए को शुद्घ दूसरों  करने वाला वाला तप फलः কল: फलः शुद्धि, शांति, दुःख, असंतोष, अज्ञान , हानि, आत्मिक उन्नति थकावट पतन गीता का संदेश तप का उद्नेश्य   आत्मशुद्धि और ईश्वर की प्राप्ति होना चाहिए, न कि दिखावा , अहंकार या க&4II दूसरों भगवद गीता में वर्णित तप (Tap) (अध्याय १७, श्लोक १४ १९) शरीर , वाणी और मन को शुद्घ करके , ईश्वर की लिए সাদি ক किया गया अथ्यास ही तप है। तप के 3 प्रकार १. सात्विक तप २. राजसिक तप 3. নাসমিক নত (Sattvik Tap) (Rajasik Tap) (Tamasik Tap) সভ্ান, মুরনা যা ৪০ ম कर्तव्य समझकर किया जाए मान सम्मान याफल की इच्छा से किया जाए किया जाए विना फल की इच्छा के दिखावे के लिए किया जाए शरीर या मन को कष्ट श्रद्घा और श्रद्धा के साथ देकर किया जाए शरीर , वाणी और मन अहंकार और प्रदर्शन को हानि पहुँचाने के लिए किया जाए को शुद्घ दूसरों  करने वाला वाला तप फलः কল: फलः शुद्धि, शांति, दुःख, असंतोष, अज्ञान , हानि, आत्मिक उन्नति थकावट पतन गीता का संदेश तप का उद्नेश्य   आत्मशुद्धि और ईश्वर की प्राप्ति होना चाहिए, न कि दिखावा , अहंकार या க&4II दूसरों - ShareChat