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#मन #बोझ #बोझ 😥 #बोझ बन जाओ तो अपनों ने गिरा देते है #जब कभी फुर्सत मिले मेरे दिल का बोझ उतार दो, मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो।
मन - काम्थकानसे ٤3٦ दह्ीथकनाहि जिननाकि ಊೆಮಗೆಹ ಪಾಈಟಣ सनभरका 001 बीङ्ख थरकर थकाजानाहि ٤٤ &٤ @ 9[83 काम्थकानसे ٤3٦ दह्ीथकनाहि जिननाकि ಊೆಮಗೆಹ ಪಾಈಟಣ सनभरका 001 बीङ्ख थरकर थकाजानाहि ٤٤ &٤ @ 9[83 - ShareChat