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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - काएं रे भन बिखिआ बन जाइ।। रे ठगमूरी खाइ। भूलौ अर्थः हे भाई! जैसे किसीघने जंगल में रास्ता भटकने पर हिंसक जानवर मीठा इंसान को नुकसान पहुँचा सकते हैं॰ वैसे ही काम, क्रोध, लोभ और अहंकार का यह विष रूपी वन' आत्मा की शांति को नष्ट कर देता है। अपनी वाणी में कबीर जी संसार के आकर्षण को ठगमूरी कहते हैं। जिस प्रकार ठग किसी लगे को नशीली वस्तु खिलाकर उसका कीमती सामान लूट लेते हैं, वैसे ही यह दुनियावी चकाचौंध इंसान के नाम रूपी अनमोल धन को लूट लेती है।मनुष्य तेरा का मन स्वभाव से चंचल है और उसको अक्सर वही चीजें लुभाती हैं जो असल में हानिकारक हैं। कबीर जी प्रश्न करते हैं कि जब तू जानता है कि यह $q' ही देगा , तो फिर तू बार ्बार वहीं क्यों जा रहा है?| रास्ता अंत भाणा अपनी बुद्धि और समय को केवल उन नाशवान चीज़ों में न लगाएँ मेरे भाई। जो अंत में पछतावा देंगी , बल्कि उस 'सत्य' की खोज करें जो आपको इस मानसिक भटकाव और मोह की नींद से बाहर निकाल सके। काएं रे भन बिखिआ बन जाइ।। रे ठगमूरी खाइ। भूलौ अर्थः हे भाई! जैसे किसीघने जंगल में रास्ता भटकने पर हिंसक जानवर मीठा इंसान को नुकसान पहुँचा सकते हैं॰ वैसे ही काम, क्रोध, लोभ और अहंकार का यह विष रूपी वन' आत्मा की शांति को नष्ट कर देता है। अपनी वाणी में कबीर जी संसार के आकर्षण को ठगमूरी कहते हैं। जिस प्रकार ठग किसी लगे को नशीली वस्तु खिलाकर उसका कीमती सामान लूट लेते हैं, वैसे ही यह दुनियावी चकाचौंध इंसान के नाम रूपी अनमोल धन को लूट लेती है।मनुष्य तेरा का मन स्वभाव से चंचल है और उसको अक्सर वही चीजें लुभाती हैं जो असल में हानिकारक हैं। कबीर जी प्रश्न करते हैं कि जब तू जानता है कि यह $q' ही देगा , तो फिर तू बार ्बार वहीं क्यों जा रहा है?| रास्ता अंत भाणा अपनी बुद्धि और समय को केवल उन नाशवान चीज़ों में न लगाएँ मेरे भाई। जो अंत में पछतावा देंगी , बल्कि उस 'सत्य' की खोज करें जो आपको इस मानसिक भटकाव और मोह की नींद से बाहर निकाल सके। - ShareChat