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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो , सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो , करनधार सदगुर दृढ़ नावा, साज सुलभ करि पावा दुर्लभ भगवान कहते है कि यह मनुष्य शरीर भवसागर (संसार रूपी समुद्र) को पार लिए एक मजबूत नाव के समान है, मेरी कृपा ही वह अनुकूल हवा ಫ ಫ है जो इसे आगे बढ़ाती है, सद्गुरु इस नाव के कुशल मल्लाह ( नाविक) हैं॰ इस हैं, उन्हें मैंने लिए सुलभ आसान) कर प्रकार, जो साधन अत्यंत तुम्हारे বুলম  दिया है अर्थात यदि हमारे पास शरीर है॰ गुरु का ज्ञान है और ईश्वर की कृपा का अनुभव है, तो संसार रूपी सागर को पार करना अत्यंत सरल है। हरि शरणं नर तनु भव बारिधि कहुँ बेरो , सन्मुख मरुत अनुग्रह मेरो , करनधार सदगुर दृढ़ नावा, साज सुलभ करि पावा दुर्लभ भगवान कहते है कि यह मनुष्य शरीर भवसागर (संसार रूपी समुद्र) को पार लिए एक मजबूत नाव के समान है, मेरी कृपा ही वह अनुकूल हवा ಫ ಫ है जो इसे आगे बढ़ाती है, सद्गुरु इस नाव के कुशल मल्लाह ( नाविक) हैं॰ इस हैं, उन्हें मैंने लिए सुलभ आसान) कर प्रकार, जो साधन अत्यंत तुम्हारे বুলম  दिया है अर्थात यदि हमारे पास शरीर है॰ गुरु का ज्ञान है और ईश्वर की कृपा का अनुभव है, तो संसार रूपी सागर को पार करना अत्यंत सरल है। - ShareChat