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#🖋ग़ज़ल #❤💖 प्यार मोहब्बत शायरी बस तुम और म💗💞❤ैं #🥰लव शायरी😘 #🖊️ लव शायरी और status ❤️ #💌शब्द से शायरी✒️
🖋ग़ज़ल - वो अजनबी तअल्लुक़ ओ ग़म याद आ गए। हम   हम नहीं रहे हमें तुम याद आ गए। थे वफ़ाओं के सिलसिले, हम   ढूँढने   चले मंज़िल से पहले पिछले करम याद आ गए। काग़ज़ पे जब उकेरी नई अश्क की लकीर, भूले   हुए थे उनके   सितम आ गए। याद महफ़िल में मुस्कुरा के जो गुज़रे वो साया-रुख़, तन्हाइयों   में डूबे याद आ   गए। भरम HH கி எ5 जो उठे होश में क़दम, हमसे मिलाते सनम आ गए। नजर याद देखा जो ख़ार ज़ारों को गुलशन के आस-्पास , अहल एन्वफ़ा के दस्त-ए क़लम याद आ गए। कर जो अंधेरों में ले चले, थाम उनके दिए वो सारे ज़ख़म याद आ गए। [ वो अजनबी तअल्लुक़ ओ ग़म याद आ गए। हम   हम नहीं रहे हमें तुम याद आ गए। थे वफ़ाओं के सिलसिले, हम   ढूँढने   चले मंज़िल से पहले पिछले करम याद आ गए। काग़ज़ पे जब उकेरी नई अश्क की लकीर, भूले   हुए थे उनके   सितम आ गए। याद महफ़िल में मुस्कुरा के जो गुज़रे वो साया-रुख़, तन्हाइयों   में डूबे याद आ   गए। भरम HH கி எ5 जो उठे होश में क़दम, हमसे मिलाते सनम आ गए। नजर याद देखा जो ख़ार ज़ारों को गुलशन के आस-्पास , अहल एन्वफ़ा के दस्त-ए क़लम याद आ गए। कर जो अंधेरों में ले चले, थाम उनके दिए वो सारे ज़ख़म याद आ गए। [ - ShareChat