MLP
🌹पारिवारिक🌹
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शाम के सात बज रहे थे। बारिश थम चुकी थी। छत से टपकती पानी की आख़िरी बूंदें आँगन में गिर रही थीं। बिजली चली गई थी, इसलिए पूरा परिवार बरामदे में बैठकर चाय पी रहा था।
तभी अचानक सरोज देवी उठीं और कमरे के कोने में रखी पुरानी लोहे की अलमारी खोलने लगीं।
उनका बेटा विवेक हँसते हुए बोला,
"अरे माँ, उस पुरानी अलमारी में अब क्या रखा है?"
सरोज देवी मुस्कुराईं,
"कुछ यादें... जिन्हें मैं कभी फेंक नहीं सकती।"
उन्होंने अंदर से मिट्टी की एक छोटी-सी गुल्लक निकाली।
गुल्लक जगह-जगह से घिस चुकी थी।
विवेक ने मज़ाक में कहा,
"माँ, इसमें अब भी पैसे हैं क्या?"
सरोज देवी ने धीरे से जवाब दिया,
"पैसे तो नहीं... लेकिन मेरी पूरी ज़िंदगी है।"
सब चुप हो गए।
विवेक ने पहली बार गुल्लक को ध्यान से देखा।
माँ ने उसे तोड़ा।
उसमें कुछ पुराने सिक्के, एक दस रुपये का नोट और एक छोटी-सी मुड़ी हुई पर्ची निकली।
पर्ची पर लिखा था—
"विवेक की पढ़ाई के लिए।"
विवेक के हाथ काँप गए।
उसने पूछा,
"माँ... ये कब का है?"
सरोज देवी ने धीमी आवाज़ में कहा,
"जब तू आठवीं में था। उस समय तेरे स्कूल की फीस भरने के पैसे कम पड़ गए थे। मैं रोज़ सब्ज़ी वाले से बचाए दो-दो रुपये इसी गुल्लक में डालती थी।"
विवेक की आँखें भर आईं।
"लेकिन माँ... आपने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?"
सरोज देवी मुस्कुराईं।
"बेटा, माँ अगर हर त्याग गिनाने लगे, तो ममता का मतलब ही बदल जाएगा।"
बरामदे में सन्नाटा छा गया।
कुछ देर बाद विवेक अंदर गया और अपनी अलमारी से एक फाइल लेकर आया।
उसने माँ के हाथ में रख दी।
सरोज देवी ने खोला।
अंदर उनके नाम से खरीदे गए छोटे-से घर के कागज़ थे।
वह हैरान रह गईं।
"ये क्या है?"
विवेक बोला,
"माँ... आपने दो-दो रुपये जोड़कर मुझे पढ़ाया था। मैंने भी कई सालों से थोड़ा-थोड़ा जोड़कर ये घर आपके नाम किया है।"
सरोज देवी कुछ बोल ही नहीं पाईं।
उन्होंने बेटे का चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया।
"मुझे घर नहीं चाहिए बेटा... तू खुश रहे, वही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।"
विवेक मुस्कुराया।
"और मेरी सबसे बड़ी दौलत... आप हैं।"
उस शाम किसी ने चाय ठंडी होने की शिकायत नहीं की।
क्योंकि हर किसी की आँखों में अपनापन गर्म था।
उस दिन मोहल्ले के लोगों ने पहली बार देखा कि एक पुरानी मिट्टी की गुल्लक करोड़ों रुपये से भी ज़्यादा कीमती हो सकती है।
सीख:
माँ-बाप बच्चों के लिए पैसा नहीं, अपना जीवन जोड़ते हैं। जब बच्चे बड़े होकर उनके त्याग की कीमत समझ लेते हैं, तभी परिवार सच में अमीर बनता है।
मंगलमय प्रभात
प्रणाम #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👌 आत्मविश्वास #🏠घर-परिवार