Swami Shri Shrijee Maharaj
हम जब साधना करने बैठते हैं, तब ध्यान में हमें ठाकुरजी के दिव्य स्वरुप का रूपध्यान करने का बार बार अभ्यास करना चाहिए l ठाकुरजी के दिव्य नीले देह पर पीतांबर सुशोभित हो रहा है, गले में सुंदर वनमाला पड़ी है l दिव्य मोतियों के हार, घुँघराली अलकावलि, कजरारे नयन, मधुर मधुर मुस्कान से मुखमण्डल सैकड़ो सूर्य को भी लज्जित कर रहा है l वे अपने चरण पर चरण रखे कदम्ब के वृक्ष के नीचे यमुना किनारे दिव्य मुरली का मधुर गायन कर रहें हैं l
श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕