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Nilesh pawar - Author on ShareChat
Nilesh pawar
532 views • 3 months ago
#बात कड़वी है पर सच्ची है #❤️जीवन की सीख #दिल को छुने वाली बात
!! गीता में लिखा है॰. !! न जन्म हमारी मर्जी से होता न ही मृत्यु, जन्म मृत्यु के बीच होने वाली व्यवस्था हमारी  নী मर्जी से कैसे हो सकती है? जो आपके योग्य होगा आपको मिल जाएगा जो नहीं होगा वो छीन जाएगा , 0 आपका काम है कर्म करते रहना.. "कर्म ही असली नियति है" @DEVRAJNARORA !! गीता में लिखा है॰. !! न जन्म हमारी मर्जी से होता न ही मृत्यु, जन्म मृत्यु के बीच होने वाली व्यवस्था हमारी  নী मर्जी से कैसे हो सकती है? जो आपके योग्य होगा आपको मिल जाएगा जो नहीं होगा वो छीन जाएगा , 0 आपका काम है कर्म करते रहना.. "कर्म ही असली नियति है" @DEVRAJNARORA
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    Nilesh pawar
    #बात कड़वी है पर सच्ची है #दिल को छुने वाली बात #❤️जीवन की सीख
    ध्यान से पढ़ लेना वरना पछताओगे ! १. भागी हुई लुगाई 2.##4##615 3. Expire 44IS ४. हराम की कमाई ५. और राजनीति में भाई ! ये कभी किसी काम के नहीं होते ! लिए ऐसी जानकारी और कुछ नया सीखने के हमें फ़ॉलो करें | ध्यान से पढ़ लेना वरना पछताओगे ! १. भागी हुई लुगाई 2.##4##615 3. Expire 44IS ४. हराम की कमाई ५. और राजनीति में भाई ! ये कभी किसी काम के नहीं होते ! लिए ऐसी जानकारी और कुछ नया सीखने के हमें फ़ॉलो करें |
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    Nilesh pawar
    #बात कड़वी है पर सच्ची है #❤️जीवन की सीख
    7:45 NR1 48805 56+ all 38% KBIs क्या आपको पता है आपकी पूजा फल इंद्र देव ले जाते हैं? ক্রা शास्त्रों के अनुसार इंद्रदेव को यह वरदान प्राप्त है कि यदि कोई व्यक्ति जप-्तप या पूजा नियम और विधान से न करे, तो उसके तप का फल इंद्रदेव को मिल सकता है। भी पूजा करने बैठें तो आसन जरूर १. जब बिछाएँ। पूजा समाप्त होने से पहले आसन के नीचे थोड़ा सा जल छोड़ें और यह मंत्र बोलें: ९ऊँ इंद्राय नमः, ऊँ   शुक्राय नमः बाद उस जल को माथे से लगाएँ, फिर $ 2. खड़े होकर आसन को सम्मान से मोड़कर अलग रख दें। ३. मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पूरा फल साधक को मिलता है॰ अन्यथा पूजा का फल इंद्र देव को चला जाता है। इसलिए पूजा के अंत में यह छोटी सी विधि करना शुभ माना जाता है। पोस्ट अच्छी लगे तो लाइक करके आगे बढ़ा दीजिए आपकी राय कमेंट में बताएं दैनिक ऐसे पोस्ट पढने के लिए इस पेज को फॉलो करे 7:45 NR1 48805 56+ all 38% KBIs क्या आपको पता है आपकी पूजा फल इंद्र देव ले जाते हैं? ক্রা शास्त्रों के अनुसार इंद्रदेव को यह वरदान प्राप्त है कि यदि कोई व्यक्ति जप-्तप या पूजा नियम और विधान से न करे, तो उसके तप का फल इंद्रदेव को मिल सकता है। भी पूजा करने बैठें तो आसन जरूर १. जब बिछाएँ। पूजा समाप्त होने से पहले आसन के नीचे थोड़ा सा जल छोड़ें और यह मंत्र बोलें: ९ऊँ इंद्राय नमः, ऊँ   शुक्राय नमः बाद उस जल को माथे से लगाएँ, फिर $ 2. खड़े होकर आसन को सम्मान से मोड़कर अलग रख दें। ३. मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पूरा फल साधक को मिलता है॰ अन्यथा पूजा का फल इंद्र देव को चला जाता है। इसलिए पूजा के अंत में यह छोटी सी विधि करना शुभ माना जाता है। पोस्ट अच्छी लगे तो लाइक करके आगे बढ़ा दीजिए आपकी राय कमेंट में बताएं दैनिक ऐसे पोस्ट पढने के लिए इस पेज को फॉलो करे
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    Nilesh pawar
    #बात कड़वी है पर सच्ची है #दिल को छुने वाली बात #❤️जीवन की सीख
    कड़वी है पर सच है I परख विवाह के बाद। पुत्र की 1. परख जवानी में। பிதி 2. ३. पति की परख पत्नी की बीमारी में। ४. पत्नी की परख पति की गरीबी में। मुसीबत में। ५. मित्र की परख ६. भाई की परख लड़ाई में। ७. बहन की परख जायदा में। में होती है। ८. औलाद की परख 64 ऐसी जानकारी और कुछ नया सीखने के लिए हमें फ़ॉलो करें | कड़वी है पर सच है I परख विवाह के बाद। पुत्र की 1. परख जवानी में। பிதி 2. ३. पति की परख पत्नी की बीमारी में। ४. पत्नी की परख पति की गरीबी में। मुसीबत में। ५. मित्र की परख ६. भाई की परख लड़ाई में। ७. बहन की परख जायदा में। में होती है। ८. औलाद की परख 64 ऐसी जानकारी और कुछ नया सीखने के लिए हमें फ़ॉलो करें |
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