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#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - यह दर्द आखिर जाएगा कहां ds अपनी सुनाएगा कहां मखोल उड़ता देखा हे इसनें महफिलों में वेदना से महरूम शमा बुझाएगा कहां यह खोल दरवाजा जाएगा कहां बेड़ियां तोड़ उड़ पाएगा कहां आदत है इसकी तो अब घुटन में जीने की की ले पाएगा कहां खुशी ; यह सांस यह शौक अपने आजमाएगा कहां अपने दफनाएगा कहां ख्वब खुद ही तोड़े हें इसने स्वपनों के शीशे अपने यह चुन चुन कर टुकड़े उठाएगा कहां यह फूल बन खिलेगा कहां खुशबू बन महकेगा कहां उजड़ गया इसका तो बागबां फिजाओं में r बोएगा कहां अब बीज अपना यह दिन अपना काटेगा कहां रैन अपनी सोयेगा कहां यह सिसक सिसक के रोया हे नजरों में अपनी अब बहता नीर पलकों में रोकेगा कहां यह उद्वेलित चित्त ठहराएगा कहां एकाग्र ध्यान लगाएगा कहां {#శా उलझा है जग जीवन के जंजालों ' यह मोक्ष का पथ पाएगा कहां स्वाती छीपा यह दर्द आखिर जाएगा कहां ds अपनी सुनाएगा कहां मखोल उड़ता देखा हे इसनें महफिलों में वेदना से महरूम शमा बुझाएगा कहां यह खोल दरवाजा जाएगा कहां बेड़ियां तोड़ उड़ पाएगा कहां आदत है इसकी तो अब घुटन में जीने की की ले पाएगा कहां खुशी ; यह सांस यह शौक अपने आजमाएगा कहां अपने दफनाएगा कहां ख्वब खुद ही तोड़े हें इसने स्वपनों के शीशे अपने यह चुन चुन कर टुकड़े उठाएगा कहां यह फूल बन खिलेगा कहां खुशबू बन महकेगा कहां उजड़ गया इसका तो बागबां फिजाओं में r बोएगा कहां अब बीज अपना यह दिन अपना काटेगा कहां रैन अपनी सोयेगा कहां यह सिसक सिसक के रोया हे नजरों में अपनी अब बहता नीर पलकों में रोकेगा कहां यह उद्वेलित चित्त ठहराएगा कहां एकाग्र ध्यान लगाएगा कहां {#శా उलझा है जग जीवन के जंजालों ' यह मोक्ष का पथ पाएगा कहां स्वाती छीपा - ShareChat